इस्‍माईलाबाद (कुरुक्षेत्र), संवाद सहयोगी। बालापुर कलावड़ गांव स्थित महामाया माता बाला सुंदरी मंदिर है। इस मंदिर की अपनी महत्ता है। दर्शन के लिए दूर-दूर तक विख्यात है। त्रिलोकपुर में माता के मुख्य स्थान के बाद इस मंदिर का नाम आता है।

ये है मान्‍यता

प्राचीन कथाओं के अनुसार जंधेड़ी गांव का खूबी राम नाई एक बार त्रिलोकपुर में माता के दर्शन के लिए गया। वहां देर शाम को द्वार पालों ने मुख्य द्वार बंद कर दिया। खूबी राम ने जब बार बार मांग की तो द्वारपालों ने कहा कि यदि इतना बड़ा भगत है तो माता उसे उसके गांव में ही दर्शन दे देगी। खूबी राम वापस लौट आया। एक रात खूबी राम गांव में पशुओं को खोजते खोजते बालापुर के पास जंगल में चला गया। वह रात को थक हारकर एक वृक्ष के नीचे सो गया। तभी उसे माता ने दर्शन देकर कहा कि जिस वृक्ष के नीचे सोया है वहां उसका स्थान है। जब वृक्ष की जड़ को खोदा गया तो वहां जलता दीया मिला। यहीं पर आसपास के गांवों ने मिलकर माता का भवन बनवाया। तब से लेकर आज तक यहां लोगों की अनेक मन्नतें पूरी होती आ रही हैं। नवरात्रों में श्रद्धालुओं का तांता लगता है।

पहुंचने का मार्ग

मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु पिहोवा-पटियाला रोड और अंबाला हिसार हाइवे से आ सकते हैं। दोनों हाइवे के बीच बालापुर कलावड़ गांव है। मंदिर तक आटो व बस सुविधा उपलब्ध है। पार्किंग, धर्मशाला, लंगर की हर समय व्यवस्था रहती है।

सुबह सायं होती है मंदिर में विशेष आरती : शिव कुमार

मंदिर सेवक शिव कुमार ने बनाया कि नवरात्रों पर यहां सुबह सायं मां की विशेष आरती होती है। मन्नत पूरी होने पर अधिकांश श्रद्धालु अष्टमी को माथा टेकने आते हैं। ऐसे श्रद्धालु प्रसाद व सामथ्र्य अनुसार भेंट चढ़ाते हैं। मंदिर कमेटी पूरा लेखा जोखा रखती है।

त्रिलोकपुर नहीं जाने वाले श्रद्धालु यहां टेकते हैं माथा : रवि कुमार

श्रद्धालु अमित कुमार ने बताया कि जो माता के मुख्य मंदिर हिमाचल के त्रिलोकपुर नहीं जा सकते हैं। वे यहां माथा टेकते हैं। दशकों से ग्रामीण अंचल का मंदिर दूर दूर तक विख्यात चला आ रहा है। मंदिर में नवरात्रों में मेला दर्शनीय रहता है। दान दक्षिणा देने वालों का भी तांता लगा रहता है।

Edited By: Anurag Shukla

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