सुरेंद्र सैनी, कैथल। गांव मोहना में गीता और उसके दो बच्चों का संघर्ष उसके पति विक्रम की मौत के साथ आठ माह पहले शुरु हो गया था। कई बार जमीन को लेकर परिवार में ही विवाद हुए तो पंचायत बुलानी पड़ी। बच्चों के जीवन के लिए वह आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ी। बुधवार की रात लूट के इरादे से घुसे युवक से उसने जमकर लोहा लिया।

भले ही उसकी हत्या हो गई, लेकिन घर के आंगन में बिखरे उसके बालों के गुच्छे उसके संघर्ष की कहानी कह रहे हैं। इस वारदात ने एक और शर्मनाक विडंबना से पर्दा उठाया। गीता, उसका 11 साल बेटा सूक्ष्म और आठ साल की बेटी स्मृति चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन मदद को कोई नहीं आया। तीन बार गांव के ही रिश्तेदारों को फोन किए गए, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। यहां तक कि किसी ने आकर संभाला तक नहीं। गीता और स्मृति की हत्या का पता भी तब चला, जब खून से लथपथ 11 साल का मासूम बेहोशी से जागा और उसने पड़ोस के घरों में दरवाजे खटखटाए।

बच्चे को खून से लथपथ देख उनके होश उड़ गए

बच्चे ने जब वारदात के बारे में बताया तो वह घटनास्थल की तरफ दौडे। यहां आकर देखा तो मां गीता व बेटी स्मृति मृत पड़ी हुई हैं। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची और पड़ोसियों से इस बारे में पूछा तो बताया कि उन्हें तो यहीं नहीं पता की रात के समय घर में कौन आया और किसने इस वारदात को अंजाम दिया। सुबह जब गांव के लोग यहां पहुंचे तो तब हमें जानकारी मिली।

रात को तेज आवाज टीवी चलने की आ रही थी आवाज

मृतका के मकान के साथ लगते मकान में रहने वाली महिला ने बताया कि वह शूगर की बीमारी से पीड़ित है, इसलिए नींद कम आती है। देर रात को मृतका गीता के मकान में तेज आवाज में टीवी चलने की आवाज सुनाई दे रही थी, इससे पहले आज तक ऐसा नहीं हुआ था। सुबह जब उसका बेटा भैंसों का दूध निकालने के लिए उठा तो उसे इस बारे में पता चला। इसके बाद वह महिला के घर पहुंची तो मां-बेटी का शव खून से लथपथ था। वारदात को किस तरह से और कितने लोगों ने अंजाम दिया, उसे इसकी जानकारी नहीं है।

आंगन में पड़े हुए मिले महिला गीता के सिर बाल

वारदात के दौरान महिला गीता ने स्वयं को और अपने दोनों बच्चों को बचाने के लिए हत्यारे के साथ संघर्ष किया। महिला के सिर के फटे हुए बाल भी आंगन में रसोई के सामने पड़े हुए थे, जिससे लगता है कि आरोपित ने महिला को कमरे के अंदर से बाहर घसीटा था। वारदात के बाद महिला व बच्ची का शव अंदर कमरे में पड़ा हुआ था। आरोपित घर की दीवार फांद कर अंदर घुसा। जिस टूंटी पर पांव रखकर दीवार से कूदा वह भी टूटी हुई थी। करनाल के गांव नवी कलां निवासी महिला गीता के पिता रमेश कुमार ने बताया कि बेटी से रोजाना बात होती थी, बुधवार शाम के समय भी बात हुई थी, सब ठीक-ठाक था, लेेकिन वीरवार सुबह अनहोनी का पता चला तो पैरों तले से जमीन खिसक गई। पिता ने बताया कि गीता का मोबाइल खराब हो गया था, तीन दिन पहले ही उसका छोटा भाई मोनू अपना फोन देकर गया था ताकि बहन को कोई परेशानी न हो। दामाद विक्रम की मौत को अभी पूरी तरह से भूला भी नहीं पाए की अब बेटी व दोहती की हत्या की वारदात ने उसकी जिंदगी के उजाड़ कर दिया।

मृतका की बहन बोली, दर्शन के साथ जमीन विवाद को लेकर रहती थी कहासुनी

मृतका गीता की बहन वर्षा ने बताया कि दो दिन पहले ही बहन गीता से बातचीत हुई थी। गीता ने अच्छे से बातचीत करते हुए सब ठीक-ठाक होने की बात कही थी, लेकिन बुधवार सुबह को पुलिस का फोन गया तो इस बारे मेंं जानकारी मिली। बेटा सूक्ष्म को गुरु नानक अस्पताल में दाखिल किया। यहां पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई हुई है। वर्षा ने बताया कि पुलिस ने बच्चे से जब पूछताछ की तो वह मौके पर थी, बच्चे ने पुलिस को बताया था कि रात को दर्शन व उसका नौकर घर पर आए थे और वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद से बच्चा पूरी तरह से घबराया हुआ है। बच्चे के चेहरे पर घटना का डर साफ दिखाई दे रहा है।

छत पर खड़ा था दर्शन व उसका नौकर

मृतक महिला गीता की देवरानी ज्योति ने बताया कि बुधवार को दिन में वह गीता के पास आई थी। वह सड़क पार मकान में रहती है, जबकि गीता का मकान खेतों के पास बना हुआ है। जब वह गीता के साथ लहसून के खेत में काम कर रही थी तो पड़ोसी दर्शन सिंह व उसका नौकर छत पर खड़े उसकी जेठानी के मकान की तरफ देख रहे थे। इस बारे में उनमें तकरार भी हो गई थी।

गीता के पति विक्रम उर्फ ऋषि की आठ माह पहले हो चुकी है मौत

स्वजनों के अनुसार महिला गीता के पति विक्रम उर्फ ऋषि की भी आठ माह पहले दिल का दौरा पड़ने से मौत हो चुकी है। विक्रम व संजीव दो भाई हैं। विक्रम के पिता दलेल सिंह तीन भाई थे, तीनों की मौत हो गई। दलेल सिंह के पास दो बेटे विक्रम व संजीव, पाला राम के पास एक बेटा दर्शन सिंह व राजा राम के पास दो बेटे सुशील व सन्नी है। सुशील व दर्शन सिंह के मकान के बीच ही गीता का मकान है। तीनों भाइयों की करीब पौना एकड़ जमीन हाइवे के निर्माण में आने से एक करोड़ 10 लाख रुपये का मुआवजा मिला था, लेकिन विक्रम को इसका पूरा हिस्सा नहीं दिया गया। आठ माह पहले विक्रम की मौत होने के बाद गीता ने शेष हिस्सा मांगना शुरू किया। गांव व रिश्तेदारों की पंचायत हुई तो दर्शन सिंह की जमीन में से घर के सामने वाली जमीन में से कुछ हिस्सा गीता को दिया गया था।

Edited By: Naveen Dalal