पानीपत [राज सिंह]। सीरो सर्वे-थ्री के परिणाम आ चुके हैं। सितंबर में स्वास्थ्य विभाग ने छह वर्ष से अधिक आयु के 2002 लोगों के रक्त नमूने पंचकूला जांच के लिए भेजे थे। बात शिक्षित,अशिक्षित की करें तो सबसे अधिक आठवीं पास लोगों (84.2 प्रतिशत) के शरीर में बनी एंटीबाडी बन चुकी है। यानि, ये कोरोना से अधिक सुरक्षित हैं। वहीं, पोस्ट ग्रेजुएट में यह आंकड़ा 76.9 प्रतिशत है।

जिला के 83 फीसद पुरुषों और 80.1 फीसद महिलाओं में एंटीबाडी बन चुकी है। जिला नोडल अधिकारी डा. ललित वर्मा ने सर्वे रिपोर्ट के हवाले से बताया कि कुल 2002 (936 पुरुष, 1066) सैंपल लिए गए थे। 83 फीसद पुरुषों और 80.1 फीसद महिलाओं में एंटीबाडी बन चुकी है। इस बार सर्वे के दौरान जिस व्यक्ति का सैंपल लिया गया, उसकी शिक्षा का उल्लेख किया गया था। रिजल्ट के मुताबिक अशिक्षितों में 79.7 फीसद, पांचवी पास 82.3, आठवीं पास 84.2, दसवीं पास 81.1, 12वीं पास 79.2, स्नातक 84.5 फीसद में एंटीबाडी बन चुकी है। अन्य श्रेणी के(पालिटेक्निक, आइटीआइ पास आदि) 82 फीसद लोगों में एंटीबाडी बनी है।

डा. वर्मा ने बताया कि शरीर में एंटीबाडी अधिक बनने की वजह दो हैं। पहली, उन्हें कोरोना हुआ हो और रोग प्रतिरोधक क्षमता बन गई हो। दूसरी, ये लोग कोरोना रोधी दोनों डोज लगवा चुके हैं। जिनके शरीर में एंटीबाडी नहीं बनी है, उन्हें अभी तक कोरोना नहीं हुआ है।

इस उम्र में इतने सैंपल लिए

164 बच्चों के सैंपल लिए

535 किशोरों के सैंपल लिए

292 सैंपल 18 से 29 आयु के लोगों के लिए गए

275 सैंपल 30 से 39 आयु के लोगों के लिए गए

258 सैंपल 40 से 49 आयु के लोगों के लिए गए

195 सैंपल 50 से 59 आयु के लोगों के लिए गए

283 सैंपल 60 से अधिक उम्र के लोगों के लिए गए

मात्र 2.5 में कोरोना के लक्षण 

सर्वे के दौरान जिन लोगों के सैंपल लिए गए उनमें से मात्र 52 (2.5 फीसद) को ही कोरोना के लक्षण दिखे थे। 1951 लोग (97.5 फीसद) ऐसे रहे, जिन्हें पता ही चला कि कोरोना हुआ था अथवा नहीं। यूं कहें कि उन्होंने कोरोना जांच ही नहीं कराई थी।

ये भी जानें 

45.8 प्रतिशत यानी 917 लोगों ने ही कोविड-19 गाइडलाइन के तहत दो गज की शारीरिक दूरी का पालन किया था

34.5 प्रतिशत यानी 690 लोगों ने गाइडलाइन का पालन नहीं किया

19.7 प्रतिशत ऐसे रहे, जिन्होंने खतरा बढऩे पर दो गज की दूरी बनाई

Edited By: Anurag Shukla