कैथल, जेएनएन। कैथल में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी जल संरक्षण के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत 200 के करीब गांव- गांव जाकर किसानों के लिए कैंप लगाएंगे। इन कैंपों के माध्यम से किसानों को धान की बजाय कपास, मक्का, अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, सोयाबीन, ग्वार, तिल मूंगफली फसलों की बिजाई कर सरकार की योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

कैथल जिले में एक लाख से भी ज्यादा किसानों की आजीविका खेती पर आधारित है। हर वर्ष इन किसानों द्वारा धान की रोपाई की जाती हैं। पिछले कई सालों से धान का रकबा बढ़ने के साथ जिले में भूजल स्तर गिरता जा रहा है। अब सरकार ने जल संरक्षण के लिए किसानों को धान की बजाय अन्य फसलों की बिजाई कराने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना लागू की है।

15 के बाद खुलेगा पोर्टल

15 के बाद मेरा पानी मेरी विरासत योजना का पोर्टल खुलेगा। किसानों को इस पोर्टल पर पंजीकरण करवाना होगा। उसके बाद ही योजना का लाभ मिलेगा। किसान आधार कार्ड, किला नंबर व फसल का नाम बताएंगे। उसके बाद विभाग इनके खाते में राशि डालेगा।

सात हजार एकड़ अनुदान राशि दे रही है सरकार

इस योजना से किसानों को जोड़कर जल संरक्षण के साथ- साथ किसानों को धान की फसल की रोपाई न करके अन्य फसल उगाने पर सरकार प्रति एकड़ सात हजार रुपये अनुदान राशि देगी। इसी के मद्देनजर अब किसानों को इसके प्रति जागरूक किया जा रहा है।

गांव-गांव जाकर कैंप लगाएंगे कर्मचारी

कृषि विभाग उपनिदेशक कर्मचंद ने कहा कि मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत कैंप लगाएं जाएंगे। इसमें एसडीओ, बीएओ, एडीओ, सुपरवाइजर की ड्यूटी लगाई गई है। ये गांव-गांव जाकर कैंप लगाएंगे। किसानों को स्कीम के बारे में समझाएंगे।

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