जागरण संवाददाता, पानीपत :

शहर में लगाई स्ट्रीट लाइट के घोटाले मामले में बुलाई बैठक रद हो गई। शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक अमित अग्रवाल ने शुक्रवार को निगम के कमिश्नर ओमप्रकाश और एसई महावीर सिंह को पंचकूला बुलाया था। बैठक में जांच कमेटी के सदस्य करनाल निगम के चीफ इंजीनियर रमेश चंद और गुरुग्राम निगम के चीफ अकाउंट ऑफिसर को भी शामिल होना था। डायरेक्टर के व्यस्त होने के कारण मीटिग नहीं हो पाई।

18 दिसंबर को शहरी स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने 15 दिनों में जांच रिपोर्ट मांग थी, लेकिन नगर निगम के अधिकारी स्ट्रीट लाइट का आधा-अधूरा रिकॉर्ड ही दे पाए हैं। पूरा रिकॉर्ड न मिलने के कारण जांच का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जांच कमेटी के सदस्य रमेशचंद ने बताया कि शुक्रवार को होने वाली मीटिग नहीं हो सकी। रिकार्ड पूरा मिलने पर ही जांच कार्य हो सकेगा।

नगर निगम पार्षद दुष्यंत भट्ट की अध्यक्षता में स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच हो चुकी है। उन्होंने 16 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट दी थी। इसमें भ्रष्टाचार सामने आया था। निजी कंपनी से मामले की जांच करवाई गई थी। बोरिग के पाइप पर कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइट लगा दी गई थी। निगम ने कई बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, सोना चांदी के कारोबार करने वाले लाइट खरीदना दिखा दिया था। अलग-अलग टेंडर में स्ट्रीट लाइट खरीदने पर अलग-अलग भुगतान किया गया था। मामले की गूंज हाउस की मीटिग में उठी थी। जिस पर विधायक प्रमोद विज ने डायरेक्ट कंपनी से स्ट्रीट लाइट खरीदने पर जोर दिया। अगला टेंडर 9000 स्ट्रीट लाइट का होना है जिसमें डायरेक्ट इलेक्ट्रिक कंपनियों से ही स्ट्रीट लाइट की खरीद होगी।

Posted By: Jagran

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