जागरण संवाददाता, पानीपत :

जगन्नाथ मंदिर में शनिवार सुबह 7 बजे गणेश पूजन के साथ जगन्नाथ भगवान, बलभद्र और देवी सुभद्रा की विशेष पूजा हुई। सुबह से मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचने लगे। भक्तों ने जगन्नाथ भगवान के दर्शन किए। स्वामी मुक्तानंद ने इस अवसर पर श्रद्धालुओं की आशीर्वचन देते हुए कहा कि भगवान विष्णु ने जगन्नाथ पुरी में विश्राम किया था। हजारों वर्षों से पुरी धाम की मान्यता है। वेद पुराण में इसका जिक्र है। पुरी में भगवान जगन्नाथ मंदिर में अनेक चमत्कार आज भी देखने को मिलते हैं। जैसे ही मंदिर में प्रवेश करते समुंद्र की लहरों की आवाज बंद हो जाती है। मंदिर से बाहर आते ही समुंद्र की लहरों की आवाज सुनाई देती है। मंदिर की गुंबद पर लगा झंडा उल्टी दिशा में लहराता है। हर रोज ध्वज बदला जाता है। जगन्नाथ यात्रा में आगे बलदेव उसके बाद सुभद्रा तथा बाद में जगन्नाथ का रथ चलता है। चार पांच माह पहले ही रथ को बनाने की तैयारी होती है। 108 कलाकार रथ बनाते हैं। इसके लिए नीम के पेड की तलाश होती है। नीम के चार तने होने चाहिए। उसके पास सांप की बांबी, कीड़ी नाल होना चाहिए। इस नीम की लकड़ी से ही जगन्नाथ रथ बनाया जाता है। पानीपत के श्रद्धालुओं का यह सौभाग्य है कि यहां पिछले 124 वर्षों से जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा निकाली जाती है। यह उत्सव का दिन। शाम 4 बजे मंदिर परिसर से शोभायात्रा निकलेगी। विभिन्न बाजारों से होते हुए देवी मंदिर जाएगी शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी रथ यात्रा का शुभारंभ करेंगी। शोभायात्रा की रवानगी से पहले भव्य आरती होगी। मंदिर में भगवान के चंवर डोलाने और चौधरी से लेकर भगवान को विराजमान करने तक बोली लगी। शहरवासी इसमें उत्साह से भाग लेंगे।

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By Jagran