पानीपत, [राज सिंह]। लॉकडाउन का विस्तार जारी है। काम-धंधे ठप होने के कारण अधिकांश पुरुष और महिलाएं घर में कैद होकर रह गए हैं। बोरियत मिटाने के लिए महिलाएं अपने पुराने शौक को जिंदा करना चाहती हैं, पति सहित ससुराल पक्ष को नागवार लग रहा है। शिक्षिकाएं इस बात को लेकर तनाव में हैं कि आनलाइन पढ़ाकर ड्यूटी पूरी करें या अपने बच्चों की पढ़ाई में मदद करें। जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता को टेलीफोन पर मिल रही शिकायतों के अंश। 

सास पतंग नहीं उड़ाने देती 

कृष्णपुरा निवासी महिला की शिकायत है कि लॉकडाउन के कारण पति सहित ससुराल पक्ष के सभी सदस्य घर में मौजूद रहते हैं। बोरियत कम करने के लिए वह पतंग उड़ाने छत पर चली जाती है, अक्सर पति साथ में होता है। पतंग काटने के चक्कर में हंसी-ठिठौली सामान्य बात है। इसी बात पर सास तरह-तरह के ताने मारती है। छत पर जाने का विरोध भी करती है।

खाने के लिए मिलती दो रोटी 

तहसील कैंप निवासी महिला ने फोन पर पति की शिकायत करते हुए बताया कि उसे पूरे दिन में दो रोटी खाने को देता है। वह दिनभर भूख से तड़पती है। फोन पर काउंसिलिंग करते हुए पति से बात की तो उसने बताया कि पत्नी मोटी हो गई है। वह उसे जींस-टॉप में स्लिम देखना चाहता है। वह उसे भूखा नहीं रख रहा है। कम खाने को कहता है, ताकि और अधिक सुंदर दिखे।

 

व्यंजन बनाना पड़ा महंगा, यू-ट्यूब के जरिए सीख रहे, सुननी पड़ रही खरी-खोटी 

मॉडल टाउन वासी महिला का कहना है कि वह लॉकडाउन के दौरान यू-ट्यूब के जरिए नए-नए व्यंजन बनाना सीख रही है। वह चाहती है कि पति घर पर है तो उन्हें कुछ अलग बनाकर खिलाऊं। इसके लिए दुकान से कुछ अतिरिक्त सामग्री मंगवानी होती है। कई बार व्यंजन ठीक से नहीं बन पाता तो सामग्री को नष्ट करना पड़ता है। इसी बात पर पति उसे खरी-खोटी सुनाता है।

लॉकडाउन से शिक्षिकाएं परेशान, स्कूल खुलने का इंतजार 

लॉकडाउन के दौरान कामकाजी महिलाएं, खासकर शिक्षिकाएं भी तनाव में हैं। दो-तीन शिकायतें फोन पर मिल चुकी हैं। शिक्षिकाओं का कहना है कि आनलाइन बच्चों को पढ़ाकर ड्यूटी कर रही हैं। ऐसे में वे अपने बच्चों की पढ़ाई में मदद नहीं कर पा रही है। घर के कामकाज का भी दबाव रहता है।

लॉकडाउन के दौरान कामकाजी-गृहणियों की नई तरह की शिकायतें फोन पर मिल रही हैं। फोन पर ही पति-पति सहित दूसरे सदस्यों की काउंसिलिंग की जाती है। परिवार में तालमेल बनाए रखने की सीख देते हैं।

रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण अधिकारी

 

Posted By: Anurag Shukla

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