पानीपत: संत निरंकारी समागम में 6 लाख लोगों के लिए लंगर, हर दिन 340 क्विंटल राशन की खपत; 20 हजार सेवादार जुटे
पानीपत में संत निरंकारी समागम में प्रतिदिन 6 लाख श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर तैयार किया जा रहा है, जिसमें 20 हजार सेवादार जुटे हैं।
-1792811389536_m.webp)
संत समागम में तैयार हो रहा लंगर (जागरण फोटो)
HighLights
प्रतिदिन 6 लाख श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर तैयार
20 हजार सेवादार निष्ठा और समर्पण से दे रहे सेवाएं
रोजाना 340 क्विंटल राशन की खपत, स्वच्छता का ध्यान
देवेंद्र जोनी, पानीपत। संत निरंकारी समागम में देश-दुनिया से पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं के आतिथ्य और सेवा का एक बेहतर नजारा देखने को मिल रहा है। समागम स्थल पर रोजाना करीब 6 लाख श्रद्धालुओं के लिए विशाल स्तर पर लंगर तैयार किया जा रहा है।
इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों के लिए भोजन की व्यवस्था निरंकारी मिशन के सेवादार पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण भाव के साथ संपन्न कर रहे हैं। समागम के दौरान लंगर की सुचारू व्यवस्था और स्वच्छता को लेकर प्रबंधन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। हर एक पहलू पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
ये हैं चार प्रमुख ब्लॉक
लंगर की इस विशाल व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए समागम स्थल को चार प्रमुख ब्लाकों- ए, बी, सी और डी में विभाजित किया गया है। इन चारों ब्लाकों में कुल मिलाकर करीब 20 हजार सेवादार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इन सेवादारों में लगभग 6 हजार महिलाएं भी शामिल हैं, जो मातृभाव के साथ भोजन तैयार करने और अन्य व्यवस्थाओं में जुटी हैं। खास बात यह है कि सभी सेवादारों की ड्यूटियां पहले से ही पूरी योजना के साथ निर्धारित कर दी गई हैं। किसी को रोटी बनाने, किसी को सब्जी तैयार करने, तो किसी को बर्तनों की सफाई और श्रद्धालुओं को पंक्तिबद्ध तरीके से खाना खिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
लाखों लोगों के लिए भोजन तैयार करने में भारी मात्रा में खाद्य सामग्री की खपत हो रही है। यदि एक ब्लाक में लंगर तैयार होने की सामान्य औसत की बात करें, तो प्रतिदिन करीब 340 क्विंटल राशन का इस्तेमाल हो रहा है। श्रद्धालुओं की संख्या के घटने-बढ़ने के साथ यह आंकड़ा भी बदलता रहता है, खासकर शनिवार और रविवार को समागम में भीड़ बढ़ने पर खपत का आंकड़ा और अधिक हो जाता है।
लंगर में क्या-क्या है?
- हर एक ब्लाॉक में 12 बड़े कढ़ाए और 10 छोटे कढ़ाए उपयोग में लाए जा रहे हैं।
- कुल कढ़ाए : चारों ब्लाकों को मिलाकर कुल 48 बड़े कढ़ाए और 40 छोटे कढ़ाए चूल्हों पर चढ़े रहते हैं, जिनमें लगातार लंगर तैयार होता है।
- शुक्रवार (समागम का पहला दिन): स्वादिष्ट आलू पराठा।
- शनिवार (24 अक्टूबर): गरमा-गरम आलू पूरी।
- रविवार (25 अक्टूबर) भाजी और रोटी
- सोमवार (26 अक्टूबर): भाजी और रोटी।
इतना राशन हो रहा इस्तेमाल
- आटा: 100 क्विंटल
- चावल: 100 क्विंटल
- हरी सब्जियां: 80 क्विं.
- दालें : 50 क्विंटल
- घी : 4 क्विंटल
इसके अलावा, एक लंगर हाल के पंडाल की क्षमता इतनी है कि वहां एक साथ 6 हजार लोग बैठकर आराम से भोजन कर सकते हैं। भोजन की गुणवत्ता और शुचिता का विशेष ध्यान रखते हुए खाना बनाते समय साफ-सफाई के कड़े मानकों का पालन किया जा रहा है।
