पानीपत/हिसार, जेएनएन। कुछ खबरें ऐसी होती हैं, जिन्हें न चाहते हुए आप तक पहुंचाना होता है। क्योंकि आपको सतर्क करना भी हमारी जिम्मेदारी है। इस उम्मीद के साथ कि दोबारा ऐसी स्थिति न बन जाए, कि फि‍र खबर आपके सामने आए।

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कोरोना संक्रमण की वजह से हरियाणा के सभी जिलों में हालात ऐसे हो गए हैं कि हर रोज मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अब तो श्मशान घाट कम पड़ने लगे हैं। रात के 12 बजे तक संस्कार हो रहे हैं। स्वजनों को अंतिम संस्कार कराने के लिए 18-18 घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसी नौबत आई ही क्यों...क्यों नहीं हम पहले  सतर्क गए। अब भी अगर खुद को को संभाल लेंगे, उतनी जल्द कोरोना को हरा सकेंगे।

पानीपत में बढ़ रहीं मौत, संस्कार के लिए दो श्मशान और जोड़े

पानीपत - दिल्ली और आसपास के मरीज भी यहां दम तोड़ रहे हैं। इनके स्वजन पानीपत में ही शव का संस्कार करा रहे हैं। पहले असंध रोड पर नहर के नजदीक श्मशान घाट में ही कोविड गाइडलाइंस के अनुसार संस्कार होता था। शव ज्यादा होने से अब नूरवाला के पास और लघु सचिवालय के पास श्मशान घाट को भी जोड़ लिया है। दोनों जगह जनसेवा दल के तीन सदस्य चमन गुलाटी, कपिल मल्होत्रा, विक्रम राणा  पीपीई किट पहनकर संस्कार कराते हैं। लकड़ी के रेट दो महीने पहले 280 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो अब बढ़कर 480 रुपये हो गए हैं। पानीपत में कोरोना की वजह से छह मई तक 295 की मौत हो चुकी है।

सिरसा में कम पड़ने लगे अंत्येष्टि स्थल

सिरसा : शिवपुरी में कोरोना संक्रमित मृतकों के लिए पहले एक बेदी थी। अब तीन बेदियों की व्यवस्था की गई। एक से लेकर छह मई तक 35 कोराेना संक्रमितों के अंतिम संस्कार शिवपुरी में किए गए हैं। सिरसा की मुख्य शिवपुरी में गैस चलित दो शव दाह प्लाट चलाने की तैयारी की जा रही है। अंत्येष्टि स्थल कम पड़ते जा रहे हैं।

Corona death

दादरी के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी लेकर जाते नगर परिषद कर्मचारी व मृतक के स्वजन। 

बहादुरगढ़ में जमीन कम पड़ रही कम

बहादुरगढ़ : कोरोना महामारी से मरने वालों की ज्यादातर संख्या दिल्ली वालों की है। इनका अंतिम संस्कार भी बहादुरगढ़ शहर में ही किया जा रहा है। हर रोज सात से 12 अंतिम संस्कार यहां पर किए जा रहे हैं। बहादुरगढ़ के तीन श्मशान घाटों में 40 अंत्येष्टि बेदी थी। माैतों का आंकड़ा बढ़ा तो जगह कम पड़ने लगी। अब नगर परिषद ने इन तीनों श्मशान घाटों में अंत्येष्टि बेदी बढ़ा दी हैं। यहां पर लकड़ी की भी कमी पड़ रही है। सामाजिक संस्थाएं आगे आई हैं। एक संस्थान ने 33 क्विंटल लकड़ी दान की है। सीएनजी शवदाह गैस प्लांट को भी चलाने की तैयारी की जा रही है।

हिसार में तैयार हो रहे दो शेड और कुंड

हिसार : हिसार में कोरोना ने कहर बरपा रखा है। हालात ये है कि हिसार के ऋषि नगर स्थित श्मशानभूमि पर शव के अंतिम संस्कार के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में अब नगर निगम प्रशासन ने आजाद नगर श्मशानभूमि पर कोरोना के कारण जान गंवाने वालों के अंतिम संस्कार के लिए अलग से व्यवस्था करवा रहा है। इसके लिए दो शेड और दो कुंड निर्माण का कार्य किया जा रहा है। कई बार तो रात करीब 12 बजे तक कोरोना के कारण मरने वालों के अंतिम संस्कार करने पड़े हैं।

कुरुक्षेत्र में चार शेड में एक दिन में 12 संस्‍कार

कुरुक्षेत्र : स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 36 दिन में 61 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई। दूसरी तरफ, श्मशान घाट में 90 से ज्यादा शवों का संस्कार कोविड गाइडलाइंस के तहत किया गया। रतनगढ़ श्मशानघाट में शवों के संस्कार के लिए चार ही शेड बने हुए हैं, लेकिन यहां एक दिन 12 शवों का संस्कार भी किया गया। कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ने के बाद शाहाबाद, पिहोवा व लाडवा नगरपालिका में भी श्मशान चिह्नित किए गए हैं। अब यहां श्मशान कम पड़ने लगे हैं।

यमुनानगर में पचास क्विंटल लकड़ी की खपत बढ़ी

यमुनानगर - कोरोना से होने वाली मौत की वजह से श्‍मशान घाटों में रोजाना पचास क्विंटल लकड़ी की खपत बढ़ गई है। एक मृतक के अंतिम संस्कार में औसतन 360 किलोग्राम लकड़ी लगती है। शमशान घाट में 625 रुपये प्रति क्विंटल लकड़ी मिल रही है। गैस चालित मशीन से भी शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। एक शव का संस्कार करने में औसतन डेढ़ से दो सिलेंडर की खपत होती है।

चरखी दादरी में अब खुले मैदान में संस्‍कार

चरखी दादरी : दादरी के गामड़ी क्षेत्र स्थित श्मशान घाट में एक कोने में टीन के नीचे बेदी चिह्नित की गई थी। यहां पर हर रोज तीन से चार अंतिम संस्कार हो रहे हैं। अब टीन शेड के साथ खुले मैदान में भी अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं।

फतेहाबाद में पशु मेला ग्राउंड को बनाया श्‍मशान

फतेहाबाद : फतेहाबाद शहर में बड़ी शिवपुरी है। प्रबंधन ने कोविड संक्रमित फैलने की आशंका से शव जलाने से इन्‍कार कर दिया है। नगर परिषद ने इलेक्ट्रोनिक चिमनी लगाई तो कहने लगे कि ये गलत लगी है। अब जिला प्रशासन ने पशु मेला ग्राउंड को अस्थायी श्मशान घाट बना लिया है। मृतक के स्‍वजन खुद अस्थियां एकत्र करते हैं।

अंबाला में बनेंगे दस नए स्लैब

अंबाला - छावनी के रामबाग श्मशान घाट पर अब अलग स्लैब बनाए जाएंगे। पिछले दिनों कोरोना संक्रमितों के संस्कार के लिए स्लैब कम पड़ गई थी। संस्कार के लिए शव लेकर पहुंचे स्वजनों को घंटों इंतजार करना पड़ा था।

करनाल में 16 से बढ़कर 66 हुए कुंड

करनला - करनाल के बलड़ी बाईपास पर बने श्मशान घाट में 66 कुंड हैं। पहले इनकी संख्या 16 थी। प्रतिदिन 80 से 100 क्विंटल लकड़ी की जरूरत यहां पड़ रही है