जेएनएन, पानीपत: हिमालय की ऊंचाई लगातार बढ़ रही है। ये हैरान कर देने वाली बात होगी। लेकिन ये हकीकत है। शोध में यह सच सामने आया है। इसका असर हमारे देश पर भी पड़ रहा है। आखिर इसकी क्या है वजह, जानने के लिए पढ़ें दैनिक जागरण की ये खास रिपोर्ट।

हर व्यक्ति के मन में जिज्ञासा रहती है कि पहाड़ कैसे और कब बने। इन्हीं प्रश्नों की खोज के लिए विशेषज्ञों की टीमें लगातार कार्य करती रहती हैं। इसी प्रकार के कार्य के लिए भू-विज्ञान मंत्रालय केंद्र सरकार की ओर से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और चार विश्वविद्यालयों के भू विज्ञान विभागों के शिक्षकों को शोध प्रोजेक्ट दिए हैं। जो अपने शोध कार्य में यह पता लगाएंगी कि हिमालय की चट्टानों की उम्र कितनी है और ये कितनी तेजी से ऊपर की ओर जा रही हैं। 

हर वर्ष कितना बढ़ रहा हिमालय पर्वत
सीधे अर्थों में शोध कार्य में यह पता लगाया जाएगा कि हमारी सीमाओं का रक्षक हिमालय पर्वत हर वर्ष ऊंचाई की ओर कितना बढ़ जाता है। कुवि के भू विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. भगवान ने प्रो. आरसी पटेल को बधाई दी है। 

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एक ही प्रकार के कार्य के लिए दो शोध
मंत्रालय की ओर से भू-विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरसी पटेल को यह शोध प्रोजेक्ट दिया है। उन्होंने बताया कि एक ही प्रकार के कार्य के लिए दो शोध प्रोजेक्ट हैं। जिनमें एक प्रोजेक्ट में वे तीन अन्य वैज्ञानिकों के साथ कार्य करेंगे। जिस पर मंत्रालय की ओर कुल 76 लाख 84 हजार 600 रुपये खर्च किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट में उन्हें 24 लाख 69 हजार 600 रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया है।  इसके अलावा इसी प्रकार के दूसरे शोध प्रोजेक्ट में 77 लाख 87 हजार 600 रुपये का प्रोजेक्ट अकेले कुवि की ओर से किया जाएगा। 

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कहां-कहां करेंगे शोध कार्य 
डॉ. आरसी पटेल ने बताया कि अब तक हुए शोध में यह पता चल चुका है कि चट्टानें हमेशा 500 डिग्री सेल्सियस तापमान में ही बन सकती हैं। पृथ्वी का तापमान एक किलोमीटर नीचे जाने पर 30 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, यानि हिमालय की चट्टानों का निर्माण लगभग 20 किलोमीटर नीचे होता है। शोध कार्य में यही जानकारी ली जाएगी कि चट्टान कितनी पुरानी है। इसके लिए फिजन ट्रेंड डेटिंग द्वारा यह जाना जाएगा कि चट्टानों की ऊपर की ओर जाने की स्पीड क्या है। 

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हर साल चार सेंटीमीटर कम हो रहा भारत 
डॉ. आरसी पटेल ने बताया कि पहले हुए शोध के माध्यम से यह पता चल चुका है कि हिमालय लगातार ऊंचाई की ओर जा रहा है। इसका कारण लगातार भारतीय द्वीप का चीन से टकराना है। जिसके कारण हिमालय ऊपर जा रहा है। इससे भारतीय उपमहाद्वीप प्रति वर्ष लगभग चार सेंटीमीटर कम होता जा रहा है। जो चीन के नीचे की ओर घूस जाता है।  

चट्टानों के लेंगे सैंपल
डॉ.पटेल के मुताबिक कि शोध प्रोजेक्ट के लिए हिमालय के कुछ हिस्से को चुना गया है। जिसमें एक शोध प्रोजेक्ट में कांगड़ा हिमाचल प्रदेश और दूसरे शोध प्रोजेक्ट में उत्तराकांशी से गंगोत्री तक का क्षेत्र लिया गया है। इन क्षेत्रों से ही चट्टानों के सैंपल लिए जाएंगे।   

यह होगा फायदा
डॉ. पटेल ने बताया कि भू विज्ञान की ओर से इस प्रकार के शोध के आमजनों को भी फायदा होगा। इससे यह पता चल सकता है कि कहां पर हिमालय पर्वत की ऊंचाई बढऩे की स्पीड ज्यादा है तो वहां भूकंप की संभावना बढ़ जाती है। वहीं ऐसे क्षेत्रों में भू-स्खलन की संभावना भी अधिक होती है। इससे बचा जा सकता है।

Posted By: Ravi Dhawan

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