करनाल, जागरण संवाददाता। करनाल बसताड़ा टोल प्लाजा पर 27 अगस्त को हुए लाठीचार्ज प्रकरण की सोमवार से जांच शुरू हो गई है। दो बज तक छह लोगों की गवाही हो गई हैं। सभी से अलग-अलग बुलाकर बात की गई। जस्टिस एसएन अग्रवाल की अध्यक्षता में प्रदेश सरकार द्वारा गठित किए आयोग के लिए पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में विशेष कोर्ट स्थापित की गई है, जहां 25 से 29 अक्टूबर तक गवाहियां होंगी। माना जा रहा है कि हर रोज छह-छह व कुल 32 संबंधित लोगों की गवाही होगी। जांच के चलते संबंधित आंदोलनकारियों, पीडि़तों व अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

बीती 25 सितंबर को प्रदेश सरकार ने जस्टिस एसएन अग्रवाल की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था। आयोग के चेयरमैन ने 11 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से काम काज संभाल लिया था। आयोग को आइएएस आयुष सिन्हा के वायरल हुए वीडियो की भी जांच करनी है, जिसमें वह पुलिस कर्मियों को आंदोलनकारियों के सिर फोड़ देने का निर्देश देते सुनाई पड़ रहे हैं।

उधर यह भी बताया जा रहा है कि आयोग के समक्ष गुरनाम चढ़ूनी सहित कृषि सुधार कानून आंदोलन से जुड़े कई नेताओं व जिला उपायुक्त निशांत यादव, एसपी गंगाराम पूनिया और आइएएस आयुष सिन्हा के भी बयान दर्ज होने हैं। बता दें कि जस्टिस एनएन अग्रवाल जांच की तैयारियों के चलते अभी तक दो बार करनाल आ चुके हैं। वे रेस्ट हाउस में तैयार की गई विशेष कोर्ट को लेकर भी दिशा-निर्देश देकर गए थे।

जिला व पुलिस प्रशासन ने की तैयारी, तत्काल दी जाएगी हर सूचना

आयोग सोमवार से अपनी जांच शुरू करने वाला है। जिला व पुलिस प्रशासन ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। पूरे प्रकरण को लेकर आयोग द्वारा मांगी जाने वाली सूचना तत्काल उपलब्ध कराई जा सके, इसके लिए कई दिनों से अधिकारी व संबंधित कर्मी जुटे हैं। एसपी गंगाराम पूनिया का कहना है कि आयोग को अभी तक जो सूचना व जानकारी उपलब्ध कराई गई है, इसका जिक्र नहीं कर सकते, लेकिन पूरी जांच के दौरान जो भी सूचना व जानकारी मांगी जाएगी, तत्काल उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके लिए जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।

आंदोलनकारी बोले, निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई हो

लाठीचार्ज प्रकरण की आयोग द्वारा शुरू की जा रही जांच पर किसानों व अन्य संबंधित अधिकारियों व आम लोगों की भी नजरें टिकी हुई हैं। किसान नेता और मृतक किसान सुशील काजल के स्वजनों ने भी निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताई है। इस संबंध में रायपुर जाटान निवासी सुशील काजल के पुत्र साहिल काजल का कहना है कि बसताड़ा में लाठीचार्ज के दौरान आंदोलनकारी जख्मी भी हुए और उनके पिता की भी मौत हुई। अब सोमवार से मामले की जांच शुरू हो रही है। यही मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो। वहीं किसान नेता जगदीप औलख का कहना है कि बसताड़ा टोल प्लाजा पर हुए लाठीचार्ज को कभी भुलाया नहीं जा सकता। किस तरह से एसडीएम ने आदेश दिए और किस तरह से आदेशों की पालना पुलिस ने की। पुलिस ने लोगों के सिर फोड़े और उनको घायल किया। अब तो यहीं मांग है कि जो भी जांच शुरू हो रही है, उसमें पूरी तरह से निष्पक्षता होनी चाहिए।

Edited By: Anurag Shukla