पूंडरी (कैथल), [संजय तलवाड़]। सावन का महीना आने वाला है और पूंडरी में सावन के हसीन तोहफे के नाम से मशहूर फिरनी बनना शुरू हो चुकी है। फिरनी एक ऐसी मिठाई है, जिसके बिना बहन की कोथली अधूरी है। भाई सावन के महीने में जब अपनी विवाहित बहनों के घर कोथली लेकर जाते हैं तो उसमें फिरनी सबसे खास मिठाई होती है। फिरनी के रेशों में रिश्तों की मिठास गूंथी जाती है।

वैसे तो फिरनी बनाने का काम करीब एक महीना पहले शुरू हो गया था, लेकिन माना जात कि फिरनी खाने का असली मजा मानसून की पहली वर्षा के बाद आता है। 30 जून को मानसून की जोरदार वर्षा के बाद अब फिरनी का सीजन पूरे यौवन पर है। पूंडरी में हलवाई का काम करने वाले सभी कारीगर अब फिरनी बनाने में जुट गए हैं। पूंडरी में प्रवेश करने वाले सभी रास्तों पर इन दिनों फिरनी की दुकानें सजी हुई है। पूंडरी-फतेहपुर में भारी तादाद में बनने वाली फिरनी प्रदेश में ही नहीं विदेशों में भी अपनी महक फैला रही है।

मैदा, घी और चीनी के मिश्रण से तैयार होने वाली इस लाजवाब मिठाई के हर वर्ग के लोग कायल है। तभी तो सावन का महीना आते ही पूंडरी की फिरनी की मांग प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आनी शुरू हो जाती है। फिरनी का सीजन शुरू होते ही फिरनी बनाने वाले कारीगरों की मांग बढ़ जाती है और ढूढने पर भी कारीगर नहीं मिलते।

आधुनिक मशीनों से तैयार किया जाता है, फिरनी का मिश्रण

पूंडरी फतेहपुर हलवाई यूनियन के प्रधान रघुबीर सैनी ने बताया कि दो से तीन महीने तक चलने वाले इस फिरनी के सीजन में वे दिन-रात काम करके भी आर्डर पूरा नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि फिरनी का मिश्रण तैयार करने से लेकर इसे बनाने की प्रकि्रया बड़े ध्यान से की जाती है, तभी फिरनी की सही मिठास और स्वाद मिल पाता है। उन्होंने कहा कि फिरनी का स्वाद क्या बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी मिलकर उठाते है। पिछले कई वर्षों से फिरनी का मिश्रण तैयार करने के लिए आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है।

भाई दूज में बहनों की दी जाने वाली कोथली में फिरनी का रहता है, विशेष स्थान

फिरनी का सीजन शुरू होते ही पूंडरी में जगह-जगह फिरनी बननी शुरू हो गई है जो कि भैया दूज तक बनेगी। भाई दूज में बहनों को जाने वाले कोथली में घेवर व अन्य मिठाइयों के साथ-साथ फिरनी की मिठाई जरूर होती है। जो सभी की पसंद है। पूंडरी-फतेहपुर में बनने वाली फिरनी के सभी कायल है, तभी तो प्रदेश के हर कोने से यहां की फिरनी की मांग है।

Edited By: Anurag Shukla