जागरण संवाददाता, पानीपत : सावित्री फुले ने शिक्षा एवं गरीबों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वह भारत में पहली महिला शिक्षिका थीं। उन्होंने वयस्क होकर पढ़ाना शुरू किया। बिश्न स्वरूप कालोनी स्थित विद्युल एकेडमी में बुधवार को आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में यह बात मुख्य अतिथि व हाली पानीपती ट्रस्ट के महासचिव राममोहन राय ने कही।

उन्होंने कहा कि पुणे में लड़कियों का एक स्कूल बनाकर पिछड़ी एवं दलित बालिकाओं को पढ़ाने का काम शुरू किया। वह उच्च कोटि की लेखिका एवम कवयित्री थी। अपनी रचनाओं से तत्कालीन भारतीय समाज को उद्वेलित किया। पुणे की दलित बस्तियों में जब प्लेग का रोग फैला, सैकड़ो लोग उसमें मरने लगें, तब एक वैद्य, परिचारिका एवं स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा की। इस सेवा के दौरान वह स्वयं भी रोगग्रस्त हो गई व अपने जीवन का बलिदान कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हरिजन सेवक संघ के जिला अध्यक्ष डॉ शकर लाल शर्मा ने कहा कि यह ज्योतिबा फुले का ही पराक्रम था, जिसने सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरुद्ध शिक्षा के प्रकाश को जागृत किया। एकेडमी की निदेशिका बबली अग्रवाल ने कहा कि यदि सावित्री पहले न होती तो महिला कर्मी कभी भी शिक्षित नहीं हो सकती थी।

इस अवसर पर ब्रेक थ्रू के प्रबंधक संजय कुमार, गाधी ग्लोबल फैमिली के युवा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष प्रदीप बंसल, सामाजिक कार्यकर्ता पूनम रानी, गीता रानी, उदय व दीपक कथूरिया उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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