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दुखद पहलू: यहां स्‍याह सच्‍चाई का भय अंधे कुएं में धकेल रहा ब‍ेटियों काे

Publish Date:Thu, 07 Dec 2017 06:08 PM (IST) | Updated Date:Fri, 08 Dec 2017 09:04 AM (IST)
दुखद पहलू: यहां स्‍याह सच्‍चाई का भय अंधे कुएं में धकेल रहा ब‍ेटियों काेदुखद पहलू: यहां स्‍याह सच्‍चाई का भय अंधे कुएं में धकेल रहा ब‍ेटियों काे
बेटियां दुनिया को अपने जज्‍बे और काैशल का कायल बना रही है, लेकिन वे अब भी बेबस सी हैं। लड़कियों से अपराध की स्‍याह सच्‍चाई का भय उन्‍हें बाल विवाह के अंधे कुएं में धकेल रही है।

जेएनएन, पानीपत। हरियाणा की बेटियां आज हर क्षेत्र में देश ही नहीं विश्वभर में विजय पताका फहरा रही हैं। बेटियों के प्रति सोच में भी बदलाव हुआ है, लेकिन वास्‍तविकता अब भी कड़वा अहसास देती है। सारी चर्चाओं व दावों के बावजूद दूसरा पहलू यह भी है कि यहां के बिगड़ते माहौल में बेटियों की जिंदगी नरक के समान पहले भी थी और आज भी है। लड़कियां बाल विवाह का संताप सहने को मजबूर हैं। इसके लिए लड़कियों के प्रति अपराध भी काफी हद तक जिम्‍मेदार हैं। बदनामी का डर अभिभावक कच्‍ची उम्र में बेटियों की शादी करने में भलाई समझते हैं।

 हरियाणा में बदनामी का डर अभिभावकाें काे कर रहा मजबूर, बेटियों को अपराध बना रहा बालिका वधू

स्कूल जा रही बच्चियों से छेड़छाड़, अपहरण कर दुष्कर्म की घटनाएं उनको जिंदगी की दौड़ में पीछे ले जा रही हैं। बाल विवाह के लिए कोई तर्क उचित न‍हीं हाे सकता, लेकिन जानकार इन घटनाओं और बदनामी के डर को भी इसके लिए जिम्‍मेदार मानते हैं। उनका कहना है माता-पिता और अभिभावक इसी कारण बच्चियों को बालिका वधू बनने पर मजबूर कर रहे हैं।

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चाचा के लड़के के साथ भागना चाहती थी

पानीपत जिले के एक गांव में ऐसा मामला सामने आया था। वहां 16 साल की लड़की की शादी 24 साल के लड़के के साथ की जा रही थी। जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय की टीम ने सूचना मिलने के बाद वहां जाकर शादी रुकवाई। इस दौरान मामले की असली वजह सामने आई कि लड़की का अपने ही चाचा के लड़के के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था और वह उसके साथ घर से भागने की कोशिश में थी। परिजनों ने समाज में अपनी इज्जत के लिए नाबालिग उम्र में ही लड़की की शादी करने का फैसला कर लिया था।

पानीपत में एक बाल विवाह रुकवाने पहुंची पुलिस व अधिकारी।

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पड़ोस के लड़के करते थे छेड़खानी

कुछ माह पहले जींद के ही एक गांव में मामला सामने आया कि 11वीं व 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली दो सगी नाबालिग बहनों की शादी उनके पिता इसलिए कर रहे थे, क्योंकि पड़ोस में रहने वाले लड़के उनसे छेडख़ानी करते थे। वे जब भी घर से बाहर निकलतीं, लड़के उन पर फब्तियां कसते थे। इससे तंग आकर पिता ने बेटियों की शादी करने में ही भलाई समझी।

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जागरूक लड़की ने रुकवाई अपनी शादी

जींद के जुलाना हलके एक गांव में नौंवी कक्षा में पढ़ रही राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी की शादी उसके पिता अपने दोस्त के बेटे से करने जा रहे थे। पिता के दोस्त ने अपने बेटे के लिए उसकी बेटी का हाथ मांग लिया, जबकि लड़की इस शादी के खिलाफ थी और वह आगे पढ़ना चाहती थी। जिस दिन शाम को उसकी बरात पहुंचनी थी,  लड़की ने अपनी सहेली को जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय शादी रूकवाने के लिए भेजा। सहेली ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दी, जिसके बाद टीम ने गांव में पहुंच कर शादी रुकवाई।

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छोटी उम्र में पड़ जाते हैं गलत संगत में

आंकड़ों को देखें तो बाल विवाह में फर्क पड़ा है, लेकिन आज भी 20 फीसद मामले ऐसे हैं, जहां नाबालिगों की शादी हो जाती है। बाल विवाह के जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें ज्यादातर में प्रेम प्रसंग के होते हैं। परवरिश की कमी कहें या टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग, छोटी उम्र में ही लड़के-लड़कियां गलत संगत में पड़ जाते हैं। अच्छे-बुरे की समझ नहीं होने के कारण गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे में परिजन समाज में कहीं बदनामी न हो जाए, इस डर से परिजन छोटी उम्र में ही उनकी शादी कर देते हैं।

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टेक्नोलॉजी से समय से पहले आ रही किशोरावस्था

जींद के जिला बाल कल्याण परिषद अधिकारी अनिल मलिक के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण परवरिश व शिक्षा की कमी है। कहीं न कहीं टेक्नोलॉजी भी जिम्मेदार है। पहले बच्चा नादान बना रहता था, लेकिन टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग होने से वह जल्दी ही बहुत कुछ जान लेता है, जिससे वह किशोरावस्था में जल्दी आ जाता है। अभिभावक शुरू में इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। जब उन्हें इसका पता लगता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। अभिभावक अपनी जिम्मेदारी से भागें नहीं और अपने बच्चे को अच्छे-बुरे के बारे में बताएं। अगर बच्चे को सही परवरिश मिलती है, तो उसे अच्छे-बुरे का अहसास होगा और वह कभी गलत कदम नहीं उठाएगा।

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जींद बाल विवाह में आगे, दो साल में 89 मामले आए सामने

जींद के जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय से प्राप्त हुए एक वर्ष के आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो बाल विवाह के मामलों में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है। पिछले दो साल में जींद जिले में बाल विवाह के 89 मामले सामने आ चुके हैं। इसमें वर्ष 2016 में बाल संरक्षण टीम के पास 61 शिकायतें पहुंचीं। इनकी जांच करने पर 55 नाबालिग लड़कियों की शादी कराए जाने की पता चला। वर्ष 2017 में अब तक 47 सूचनाएं पहुंची हैं। जिनमें 34 नाबालिग लड़कियों की शादी होती मिली।

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बिगड़ता लिंगानुपात भी बड़ा कारण

बिगड़ते लिंगानुपात के चलते अदला-बदला कुप्रथा लगातार बढ़ रही ही है। इसे राज्‍य के ग्रामीण क्षेत्रों में आट्टा-साट्टा के नाम से जाना जाता है। इस प्रथा के तहत परिवार के लड़के की शादी कराने के लिए एक समझौता किया जाता है। इसके तहत लड़कियों की अदला-बदली की जाती है। अपने घर की लड़की को उस परिवार को दिया जाता है जोकि अपनी बेटी की शादी उनके बेटे से करतें हैं। इस प्रकार के विवाह में किसी घर की बेटी को उसकी भाभी के संबंधी के साथ ब्याह दिया जाता है।

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कई मामले ऐसे भी

जहां अभिभावक ब्याह का खर्च बचाने के लिए अपने बड़े भाई या बहन के साथ छोटे भाई या बहन की भी शादी एक ही साथ कर देते हैं। इन मामलों में छोटे भाई या बहन नाबालिग पाए जाते हैं। 20 अक्टूबर को जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध कार्यालय की टीम ने एक शादी रुकवाई, जहां दूल्हे की उम्र महज 13 साल थी और दुल्हन की उम्र साढ़े 17 साल। दूल्हे के 20 साल के भाई की भी शादी एक ही घर में दो सगी बहनों से होने जा रही थी। वर व वधू पक्ष एक ही कार्यक्रम में दोनों की शादी करना चाहते थे, ताकि दोबारा शादी का खर्च न उठाना पड़े।

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खाप व पंचायतें आएं आगे

कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला के अनुसार, सामाजिक ताना-बाना रहे, इसके लिए खाप पंचायतों को आगे आना होगा। इसके लिए गांव-गांव जाकर अभियान चलाए जाने की जरूरत है। मां-बाप को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपने बच्चे को अच्छे-बुरे का अहसास कराना होगा। खापें शादी के लिए लड़की की उम्र 18 व लड़के की उम्र 21साल के पक्ष में रही हैं। इसके लिए खापों के साथ-साथ सरकार को भी आगे आना होगा।

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देते हैं लोकलाज का हवाला

कुछ परिवार लोग लड़की को बोझ समझते हैं। माहौल खराब होने की बात सोचकर परिवार के लोग छोटी उम्र में ही लड़कियों की शादी कर देते हैं। उनका मानना होता है कि जमाना खराब है तो जितनी जल्दी लड़की को शादी करके ससुराल भेज देंगे उतना ही ठीक रहेगा। लोकलाज के डर से यह कदम उठाया जाता है।

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यमुनानगर में 25 नाबालिग लड़कियों की शादी की कोशिश

यमुनानगर में 21 महीने में 25 लड़कियों की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में करने की कोशिश की गई। काउंसिलिंग में सामने आया कि 18साल से पहले उन्हीं लड़कियों की शादी की जा रही थी जिनके साथ छेड़छाड़ हुई थी या फिर उन्हें कोई युवक शादी का झांसा देकर बहला फुसला अपने साथ ले गया था।

काउंसिलिंग के दौरान ज्यादातर लोगों ने बताया कि जिस बेटी को उन्होंने जैसे-तैसे स्कूल में पढ़ाया, अब आते-जाते उनके साथ छेड़छाड़ की घटनाएं होने लगी हैं। बेटी सुरक्षित नहीं है। बेटियां नादान हैं। इसलिए कई मामलों में युवक उन्हें शादी का झांसा देकर अपने साथ भगा भी ले गए। इससे समाज में पूरे परिवार की बदनामी होती है। शादी के बाद बेटी ससुराल चली जाए। यही सोचकर शादी का फैसला लिया जाता है।

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अब पोक्सो एक्ट के तहत भी दर्ज होगा केस

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया है कि नाबालिग लड़की से शादी करने वाले पर पोक्सो एक्ट के तहत भी केस दर्ज होगा। बाल विवाह करने पर एक साल की सजा व दो लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। पोक्सो एक्ट लगने पर सजा सात साल से उम्रकैद तक हो सकती है। इसके अलावा जुर्माने का भी प्रावधान है। इसी साल उत्तराखंड के अल्मोड़ा में बाल विवाह करने वाले लड़की के पिता को न्यायालय ने आजीवन कारावास व दूल्हे समेत छह लोगों की 10 साल कैद की सजा भी सुनाई।

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एक किशोरी को होना पड़ा शिकार

जगाधरी की एक १६ साल की किशोरी की शादी मंदबुद्धि युवक से कर दी गई। अधिकारियों को पता तक नहीं चला। इसका पर्दाफाश तब हुआ जब किशोरी की मां ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर फोन किया। किशोरी ने पहले तो आरोप लगाया था कि उसका ससुर उसके साथ छह माह से दुष्कर्म कर रहा है, लेकिन बाद में बयान से पलट गई थी। किशोरी की शादी उसकी नानी, मां व स्कूल के प्रिसिपल ने कराई थी।

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कुरुक्षेत्र में आईं बाल विवाह की 30 शिकायते

कुरुक्षेत्र में चार साल में जिला बाल विवाह निषेध अधिकारी कार्यालय में 30 शिकायतें आई हैं। इसमें से 12शादियों को रुकवाया गया, जबकि आठ पर पुलिस कार्रवाई के लिए लिखा गया।

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रुढि़वादिता की जड़ें हैं गहरी : डॉ. बजार्ड

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. बिजेंद्र बजार्ड का कहना है कि बाल विवाह बेहद पुरानी सामाजिक बुराई है। इसका इतिहास रहा है। यह कुप्रथा आर्थिक रूप से निम्न वर्ग में अधिक है, इस कुप्रथा की शिकार लड़कियां होती हैं। सामाजिक शोध में महत्वपूर्ण कारण प्रेम प्रसंगों के रूप में सामने आया है, जिसमें माता-पिता सामाजिक मान-प्रतिष्ठा को बचाने के लिए प्रेम संबंधों मं लिप्त अव्यस्क पुत्री का विवाह करने की जल्दी करते हैं। ऐसी स्थित में प्रेमी बाल संरक्षण अधिकारी को सूचना देता है। इस सब कारकों व कारणों को ध्यान में रखा जाए तो इस कुप्रथा को उन्मूलन के लिए कानून के साथ अन्य उपाय भी किए जा सकते हैं। 

 

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Web Title:Jagran special story on child marriage in Haryana(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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