हरियाणा में नहीं रुक रहे बाल विवाह

राज सिंह, पानीपत

कुछ दिन पहले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के उत्थान की बड़ी बड़ी बातें हुईं। म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के..का दम भरने वाले हरियाणा में बाल विवाह रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की राह में कम उम्र में शादी बड़ी बाधा बन गया है।

महिला एवं बाल विकास विकास विभागा के आंकड़ों के मुताबिक 17 जिलों में जनवरी 2017 से फरवरी 2018 तक बाल विवाह की कुल 536 शिकायतें प्राप्त हुईं। बाल विवाह निषेध अधिकारियों द्वारा पुलिस बल की मदद से कुल 409 बाल विवाह रुकवाए गए। इनमें 35 मामले ऐसे भी हैं, जिनमें आरोपितों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई गई। बाकी जिलों के बाल विवाह रुकवाने के मामलों को जोड़ दिया जाए तो संख्या 600 तक पहुंच सकती है। सबसे अधिक सोनीपत में 57 बाल विवाह रकवाए गए। दूसरे नंबर फतेहाबाद में 56, तीसरे नंबर पर मेवात में 44 बाल विवाह रुकवाए गए। सबसे अधिक मुकदमे अंबाला में दर्ज कराए गए। पानीपत में चौदह माह के अंतराल में 38 बाल विवाह रुकवाए गए और 5 मुकदमे दर्ज कराए। प्रदेश सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2014-2015 के दौरान प्रदेश में बाल विवाह के 246 केस रुकवाए गए । एक अप्रैल 2016 से जून 17 तक की रिपोर्ट के मुताबिक बाल विवाह के 427 मामले रुकवाए। कुषाण कालीन बाल विवाह कुप्रथा इक्कीसवीं सदी में कम न होना स्वस्थ समाज के लिए ¨चता बनी हुई है।

बताते चलें कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत लड़की का विवाह 18 वर्ष से कम तथा लड़के का विवाह 21 वर्ष से कम आयु में करना गैरकानूनी है। बाल विवाह के आरोपितों को 2 साल की सजा व 1 लाख रुपये का जुर्माना भी हो सकता है। माता-पिता, रिश्तेदार, पंडित, काजी व मंडप-धर्मशाला के मालिक-मैनेजर को भी शामिल किया गया है।

गरीबी व अशिक्षा बड़ा कारण :

बाल विवाह मामलों में गरीबी-अशिक्षा बड़ा कारण है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे माता-पिता को बेटियों की सुरक्षा की ¨चता रहती है। सामाजिक दबाव रहता है। अशिक्षा के कारण पता नहीं होता कि कच्ची उम्र में शादी करने से बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा ।

आन्टा-सान्टा कुप्रथा भी ¨चता :

हरियाणा में कई जातियों में अभी तक प्राचीन आन्टा-सान्टा प्रथा चली आ रही है। इसमें किसी वर को वधू चाहिए तो बदले में पत्?नी पक्ष के किसी लड़के से अपनी बहन का विवाह करना होता है। ऐसे विवाह भी कच्ची उम्र में कर दिए जाते हैं। विवाह के लिए नाबालिग लड़कियों को अगवा करना समाज के लिए बड़ी ¨चता है।

बाल विवाह के दुष्प्रभाव :

1. घरेलू व ¨लग आधारित ¨हसा।

2. लड़कियों की खरीद फरोख्त में वृद्धि ।

3. पढ़ाई छोड़ने की घटनाओं में वृद्धि।

4. बाल मजदूरी, कामकाजी बच्चों का शोषण।

5. समय से पहले गृहस्थ की जिम्मेदारी।

एक नजर सुखद पहलू पर भी :

यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बाल विवाह पर तेजी से लग रहे अंकुश की वजह से दक्षिण एशिया में बाल विवाह की दर 50 फीसदी से घटकर 30 फीसदी पर आ गई है । रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 साल में भारत में बाल विवाह की दर 47 फीसदी से घटकर 27 फीसदी रह गई है ।

यहां दे सकते हैं सूचना :

पहले से चल रहे हेल्पलाइन नंबर 1098, 1090, 181 और 100 नंबर पर, उपायुक्त, एसडीएम, महिला एवं बाल विकास, सीडब्ल्यूसी को भी बाल विवाह की सूचना दी जा सकती है। सूचना देने वाले का नाम पता गोपनीय रखा जाएगा।

वर्जन :

बाल विवाह की शिकार लड़कों की अपेक्षा लड़कियां अधिक होती हैं। 18 वर्ष की उम्र से पहले लड़की मानसिक व शारीरिक रूप से पूरी तरह विकसित नहीं होती। विवाह उपरांत प्रेगनेंसी के समय गर्भपात, मृत प्रसव, शिशु मृत्यु दर का डर बना रहता है।

डॉ. संतलाल वर्मा, सिविल सर्जन-पानीपत

वर्जन :

सरकार और समाज को बाल विवाह के खिलाफ जागरुक रहने की जरूरत है। हालांकि, अब बेटियां खुद आगे आकर विरोध करने लगी हैं।सूचनाएं भी मिल रही हैं। हमें ऐसी परिस्थिति पैदा करनी होंगी, कि बाल विवाह पर विराम लगे।

रजनी गुप्ता, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप