पानीपत/करनाल, [पवन शर्मा]। पूरी दुनिया में खौफ बरपा रहे कोरोना वायरस ने कई देशों में जहां चीन के लिए दरवाजे बंद कर दिए हैं, वहीं भारतीय चावल निर्यातकों के लिए इसका पॉजिटिव इफेक्ट साबित दिख रहा है। दुबई में चल रहे गल्फ फूड मेले में हरियाणा सहित देश के कई राज्यों के चावल निर्यातकों के उत्पाद बेहद पसंद किए जा रहे हैं। अफ्रीकी बाजारों में भी भारतीय कारोबारियों की पकड़ नए सिरे से मजबूत हो रही है। 

दुबई के वल्र्ड ट्रेड सेंटर में इन दिनों गल्फ फूड फेयर चल रहा है। इसमें अन्य खाद्य व पेय पदार्थों के साथ चावल उद्योग से जुड़े दुनिया भर के कारोबारी भाग ले रहे हैं। करनाल के तरावड़ी से फेयर में पहुंचे विजय गोयल ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में न केवल अपने उत्पाद पूरी दुनिया के सामने पेश करने का बेहतरीन मौका मिला, बल्कि अच्छे ऑर्डर भी हासिल हुए हैं।

फेयर में ये शामिल रहे

फेयर में श्रीकृष्णा राइस मिल तरावड़ी, श्री जगदंबा एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट घरौंडा, श्रीराम राइस करनाल, जानकीदास राइस मिल तरावड़ी, पूरनचंद राइस मिल तरावड़ी, रॉयल स्टार एग्रोटेक करनाल, भारत इंडस्ट्रियल एंटरप्राइजेज तरावड़ी, अरोमा एग्रोटेक घरौंडा, बंसल फूड्स सहित कई निर्यातकों ने प्रतिभाग किया। वहीं गन्नौर, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अंबाला से भी निर्यातकों ने यहां प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई। 

चीन से मिल रही थी कड़ी चुनौती

कमोबश, यही स्थिति अफ्रीकी बाजारों की भी है, जहां दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक भारत को पड़ोसी देश चीन से कड़ी चुनौती मिल रही थी। चीन ने अफ्रीकी बाजारों में भारी मात्रा में चावल उतार भी दिया था, जिससे भारत के गैर बासमती चावल का निर्यात 2019 के शुरुआती आठ महीनों में 2018 की समान अवधि की अपेक्षा 35 फीसद तक गिर गया था। कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने आकलन किया था कि चीनी चावल की कीमत भारतीय चावल से कम होने के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा था। वहीं अब अफ्रीका के बेनिन, सेनेगल और गिनी सरीखे देशों में भारतीय निर्यातकों के लिए संभावना के नए द्वार खुल गए हैं। चीन के एक और पड़ोसी नेपाल में भी भारतीय चावल की मांग नए सिरे से बढ़ रही है। यही नहीं, अब भारतीय चावल कारोबारियों की निगाहें अमेरिका पर हैं। चावल निर्यातकों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी वार्ता में यदि दोनों देशों के बीच बेहतर वाणिज्यिक समझौता हुआ तो इसका फायदा उनके कारोबार को भी अवश्य मिलेगा।

यह बोले कारोबारी

भारतीय चावल उद्योग के सामने चुनौतियों का पहाड़ है लेकिन नए बाजार मिलते रहे तो हालात सुधरने में देर नहीं लगेगी। सरकार को भी चावल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में जरूरी प्रावधान करने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार व निर्यात हितैषी नीतियां लागू करनी चाहिए। दुबई से लेकर ब्रिटेन, अमेरिका और अफ्रीका में संभावनाएं तलाशने पर फोकस है।

सुशील जैन, ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

सूरत-ए-हालात

हालिया समय भारतीय चावल उद्योग के लिए अच्छा नहीं रहा है। गत वित्त वर्ष अप्रैल से अगस्त के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 10.27 फीसद की गिरावट आई और कुल निर्यात 16.6 लाख टन का ही हो सका। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 18.5 लाख टन का निर्यात हुआ था। वहीं गैर बासमती चावल के निर्यात में पिछले साल 35 फीसद तक की गिरावट दर्ज की गई। इस साल यह आंकड़ा और नीचे पहुंचने का खतरा है। 

इन देशों में होता है भारतीय चावल का निर्यात

ईरान, इराक, सउदी अरब, ब्रिटेन, जर्मनी, बहरीन, कुवैत, कतर, सर्बिया, रशिया, आस्ट्रेलिया, यूएसए, उजबेकिस्तान, मॉरीशस, नेपाल, बेनिन, सेनेगल, गिनी, सिंगापुर व अन्य देशों में चावल निर्यात होता है।

बीते वर्ष बासमती चावल के निर्यात में गिरावट - 10.27 फीसद।

गैर बासमती चावल के निर्यात में गिरावट - 35 फीसदी।

बासमती चावल के सबसे बड़े खरीददार देश- ईरान, सउदी अरब व ब्रिटेन।

गैर बासमती चावल के सबसे बड़े खरीददार- नेपाल, बेनिन, सेनेगल, गिनी।

बासमती चावल के सबसे बड़े एशियाई देश- भारत, थाइलैंड, वियतनाम व पाकिस्तान।

एफसीआइ के गोदामों में दिसंबर 2019 तक भंडार- 212.79 लाख टन चावल व 259.11 लाख धान।

Posted By: Anurag Shukla

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस