पानीपत, जेएनएन - यमुना नदी का रेत माफियाओं के लिए सोना साबित हो रहा है। दिन-रात बड़ी-बड़ी जेसीबी से खनन का कार्य जारी है। ठेकेदारों ने उत्तर प्रदेश जिला शामली के गांव नंगला राई में खनन का ठेका लिया हुआ है। उसी की आड़ लेकर हरियाणा की सीमा नदी से रेत निकालकर सरकार को लाखों रुपये राजस्व की रोजाना चपत लग रही है। अधिकारी है कि देखकर भी मौन साधे हैं।

हरियाणा के गांव कुंडला-पत्थरगढ़ वासी किसानों की जमीन पर उप्र. के गांव नगला राई निवासी किसान रेत खनन का कार्य करा रहे थे। हाई कोर्ट ने इस पर गत वर्ष हरियाणा के किसानों को स्टे भी दिया था। स्टे को दरकिनार करते हुए माफियाओं ने दोबारा से रेत खनन शुरू कर दिया है। पत्थरगढ़-कुंडला नवादा, तामसाबाद के किसान कर्मबीर, सब्बीर, आलम सहित कई किसानों ने सनौली थाना में शिकायत दी है। पुलिस को स्टे की कापी भी दी गई है।

शिकायत पर सुनवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन के उच्चाधिकारियों को शिकायत देने की चेतावनी दी है। थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अधिकािरयों के संज्ञान में मामला लाया जाएगा। हाई कोर्ट के स्टे और अधिकारियों के आदेशानसार अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।

डीसी के आदेश पर बंद हुआ था रेत खनन

14 जुलाई 2020 को हाई कोर्ट के आदेश पर डीसी पानीपत धर्मेंद्र‎ सिंह ने माइनिंग अधिकारी और तहसीदार को अवैध रेत खनन कर कार्रवाही के आदेश दिए थे। नौ जून 2020 को तहसीलदार बापौली ने कानूनगो राकेश और पटवारी सुरेंद्र से निशानदेही कराई थी। इसमें पता लगा था कि हरियाणा की सीमा में 22 एकड़ भूमि में रेत खनन किया गया था। रिपोर्ट देखने के बाद डीसी ने कार्रवाई के आदेश दिए थे।

रेत खनन से बाढ़ का बढ़ता खतरा 

रेत खनन से हरियाणा सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। यमुना नदी की तलहटी में बसे गांवों में बरसात के दौरान बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है। उप्र. के गांव ममोर ओर गांव मवी में भी लगभग एक किमी. के दायरे में रेत खनन चल रहा है। रेत भरे डंपर हरियाणा क्षेत्र में मार्गों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

Edited By: Ravi Dhawan

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