करनाल, जागरण संवाददाता। करनाल से आस्ट्रिया नौकरी करने गए युवक की मौत की खबर के बाद घर में मातम पसर गया। 13 साल पहले युवक करनाल से आस्ट्रिया नौकरी की तलाश में गया था। फिर उसने वहां ड्राइवर के साथ साथ कई अन्य काम किए। इस दौरान उसे वहीं एक लड़की से प्यार हो गया। जिससे उसने लव मैरिज कर ली। 13 साल बाद अचानक उसके परिवार के पास उसकी मौत की खबर पहुंचती है। जिससे पूरा परिवार सन रह जाता है।

करनाल के सीकरी गांव के रहने वाले संजीव की आस्ट्रिया में बीमारी के चलते मौत हो गई है। जिसकी सूचना मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। संजीव को अंतिम समय में अपनी मिट्टी भी नसीब नहीं हो पाएगी और उसके शव का अंतिम संस्कार वहीं पर 26 जनवरी को किया जाएगा। इसके लिए वहां रहने वाले भारतीय लोगों ने सभी तैयारी पूरी कर ली है।


तीन साल पहले आया था भारत

जानकारी के अनुसार दो भाईयों में बड़ा संजीव कुमार करीब 13 साल पहले आस्ट्रिया गया था। वहां कभी चालक तो कभी अन्य प्रकार के कार्य कर अपना गुजर बसर करने लगा था। स्वजनों के मुताबिक 2015 में उसने वहीं पर लव मैरिज कर ली थी, लेकिन वहां रहने को लेकर दस्तावेज पूरे न होने के चलते तीन साल पहले उसे भारत के लिए डिपोट कर दिया गया था। लेकिन उसकी पत्नी ने वहां पर अदालत में केस दायर कर संजीव को वहीं पर बुलाने के लिए लड़ाई लड़ी। बाद में अदालत ने उसे वहीं पर बुलाए जाने के आदेश सुना दिए थे, जिसके चलते 18 माह तक यहां रहने के बाद वह 21 जनवरी 2019 को फिर आस्ट्रिया चला गया था।

1800 यूरो जुर्माना भरने का आया था आखिरी मैसेज

भाई सलिंद्र ने बताया कि उनके पास आठ दिसंबर को संजीव ने मैसेज भेजा था, जिसमें बताया था कि कुछ समय पहले गाड़ी चलाने के दौरान हुए यातायात नियमों की अवहेलना पर उसे 1800 यूरो का जुर्माना भुगतना है। वह इसके लिए थाने जा रहा है और अब करीब डेढ़ माह तक उसकी मोबाइल पर भी बात नहीं हो सकेगी। उन्हें शंका था कि जुर्माने के चलते उसे कुछ दिनों के लिए सजा की होगी, लेकिन अब उनके पास आस्ट्रिया में ही रहने वाले गांव खनौदा वासी युवकों ने 17 जनवरी को काल कर बताया कि उसकी बीमारी के चलते मौत हो गई है। इससे पूरा परिवार गम में डूब गया।

अपने वतन नहीं लाया जा सकेगा शव

सलिंद्र का कहना है कि उसका भाई पहले भी अक्तूबर माह में लीवर खराब होने के चलते बीमार हो गया था। कुछ दिन बाद वह ठीक हो गया था। वह दीवाली पर यहां आना चाहता था, लेकिन बीमारी के चलते उसे वहां कोरोना रोधी टिका नहीं लगाया जा सका। ऐसे में उसका यहां आना संभव नहीं हो सका। इसी अड़चन के चलते उसका शव भी यहां नहीं लाया जा सकेगा। अब वहां रहने वाले करनाल, कैथल व आसपास के लोग ही उसके शव का अंतिम संस्कार करेंगे।

Edited By: Rajesh Kumar