कैथल, जेएनएन। 15 जून से धान रोपाई का सीजन शुरु हो रहा है, लेकिन कोरोना बीमारी के कारण बिहार से आने वाली ट्रेनें बंद पड़ी है, प्रवासी मजदूरों ने रोडवेज बसों का सहारा लेना शुरू कर दिया हैं। कैथल डिपो की बसें सुबह से शाम तक लगभग 600 प्रवासी मजदूर को लेकर आ जा रही हैं। बता दें कि दिनभर बस स्टैंड परिसर में आने जाने वाले प्रवासी मजदूरों की टोलियां बैठी रहती है।

बिहार से आए प्रवासी मजदूर अवतार सिंह, जीता राम, अशोक ने बताया कि ट्रेनें तो बंद पड़ी हैं, लेकिन परिवार का पालन पोषण करना तो जरूरी है, इसलिए बसों का सहारा लेकर धान लगाने के लिए आना पड़ रहा है। प्रवासी मजदूरों ने सरकार से मांग की है कि वे दूसरे राज्यों में जाने के लिए ट्रेनों की शुरुआत करें। ताकि उनका सीजन अच्छा रहे। आने जाने में परेशानी न हो।

जिले में पिछले साल कम आए थे प्रवासी मजदूर

बता दें कि कोरोना महामारी में पिछले साल जिले में ट्रेन व बस बंद होने के कारण कम प्रवासी मजूदर ही धान लगाने के लिए आए थे। जिसके कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। प्रवासी मजदूर न होने से लोकल मजदूरों ने धान लगाने के लिए करीब 3500 से चार हजार रुपए प्रति एकड़ वसूले थे। लेकिन इस बार प्रवासी मजदूरों के आने से परेशानी नहीं होगी। इससे किसानों को भी काफी राहत मिलेगी।

कैथल में धान फसल की अच्छी बिजाई होती है। एक लाख 55 हजार हेक्टेयर में किसान धान की रोपाई करते है। पूंडरी व ढांड, गुहला क्षेत्र की बासमती चावल की अच्छी डिमांड है। दूर- दूर से व्यापारी खरीदकर ले जाते है।

कुरुक्षेत्र व अंबाला से आने वाली बसों के फेरे बढ़ाए: जीएम अजय

रोडवेज की बसों में प्रवासी मजदूरों की अच्छी संख्या हो रही है। प्रवासी मजदूरों के लिए स्पेशल बसें भी चलाई जाती है। बस स्टैंड पर प्रवासी मजदूरों को परेशान नहीं होने दिया जा रहा है। कुरुक्षेत्र व अंबाला से आने वाली बसों के फेरे बढ़ाए गए है। आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है। डिपो से रोजाना 80 के करीब बसें चल रही है।

अजय गर्ग, जीएम रोडवेज कैथल

Edited By: Anurag Shukla