अंबाला, [दीपक बहल]। अंतरराज्यीय शराब तस्करी से राज्य सरकार को होने वाले राजस्व के नुकसान से बचाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसआइटी) ने शराब फैक्ट्रियों से निकलने वाले वाहनों पर ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और बायोमीट्रिक सिस्टम लगाने की सिफारिश की थी। ताकि फैक्ट्री से निकलते समय और डिलीवरी के समय वाहन चालक अपना अंगूठा लगाएं। हालांकि एसआइटी की सिफारिशों पर हरियाणा पुलिस ने जीपीएस प्रणाली का प्रयोग तो चुपचाप शुरू कर दिया है, लेकिन आबकारी एवं कराधान विभाग ने इस ओर अभी तक कोई कदम नहीं बढ़ाया है।

वाहन में जीपीएस प्रणाली लगाने के कारण ही हरियाणा पुलिस ने पिछले दिनों अंतरराज्यीय शराब तस्करी के रैकेट का भंडाफोड़ किया था। चंडीगढ़ से अरुणाचल प्रदेश के लिए परमिट लेकर निकली शराब उत्तर प्रदेश के झांसी में पहुंच गई थी, जहां लखनऊ एसआइटी ने पकड़ लिया।

सूत्रों के मुताबिक शराब घोटाले में एसआइटी ने जांच कर कई अहम बिंदुओं पर सिफारिश की थी, जिनमें जीपीएस प्रणाली भी एक थी। सिफारिश की गई थी कि शराब फैक्ट्रियों में अनुमति के बाद कितनी शराब बन रही है और कितनी बनने की अनुमति है, इसके लिए फ्लोमीटर लगाए जाएं। हाल ही में अंबाला पुलिस की ही जांच में स्पष्ट हो चुका है कि चंडीगढ़ की विनायक डिस्टिलरी में अनुमति से अधिक शराब बनती थी।

इस फैक्ट्री में शराब बनाने के लिए मध्य प्रदेश से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) तस्करी कर लाया जाता था। इसी ईएनए से इस फैक्ट्री में शराब बनाकर ट्रकों के माध्यम से अन्य राज्यों में तस्करी की जाती थी। तकनीक के माध्यम से जिस तरह पुलिस ने कदम बढ़ाया है उसी तरह यदि आबकारी विभाग के अधिकारी भी तकनीक का इस्तेमाल करें तो शराब तस्करी रुकेगी और सरकारी राजस्व में इजाफा होगा। उधर, प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि सभी एसपी और आइजी को आदेश जारी किए हैं शराब तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसलिए की गई थी सिफारिश

एसआइटी की सिफारिशों पर जीपीएस प्रणाली और बायोमीट्रिक के अलावा साफ्टवेयर की भी सिफारिश की गई थी कि ताकि पता चल सके कि किस नंबर की गाड़ी किस शराब फैक्ट्री से निकली और कहां पहुंची। अंबाला पुलिस की जीपीएस प्रणाली के प्रयोग ने साबित कर दिया है कि शराब तस्करी को रोकने के लिए यह तकनीक कितनी कारगर है।

Edited By: Anurag Shukla