पानीपत/करनाल, [प्रदीप शर्मा]।  राहत की खबर यह है कि इस बार मानसून समय से पहले आ सकता है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात की गतिविधियां मानसून आगमन के अनुकूल हैं। मौसम विभाग का आकलन है कि मानसून 28 मई तक केरल के तट पर दस्तक दे सकता है। पिछले वर्ष यहां मानसून 6 जून को पहुंचा था। इस बार मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात मानसून को एक्टिव कर रहा है। मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा और 8 जुलाई से सितंबर मध्य तक देश में सक्रिय रहेगा। इस बार मानसून की विदाई भी देरी से हो सकती है।

अभी तपाएगी गर्मी

मई के 18 दिन बाद मंगलवार को एक बार फिर सुबह की शुरुआत गर्म मौसम से हुई। गर्म हवाओं के थपेड़ों ने राहगीरों को गर्मी का एहसास कराया। मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो अगले तीन दिनों तक दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। 22 मई तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी। 


क्या फायदा होगा

धान का कटोरा कहे जाने वाले हरियाणा में 15 जून के बाद ही धान की रोपाई होगी। जुलाई माह के पहले सप्ताह तक रोपाई का काम निपटा लिया जाता है। जिस समय धान रोपाई का काम होता है, उसी समय मानसून की सक्रियता अधिक बढ़ेगी। अधिक बरसात होगी तो किसानों को ट््यूबवेल या सबमर्सीबल के पानी पर निर्भर कम रहना पड़ेगा। प्रदेश में हर साल 15 लाख से अधिक हेक्टेयर जमीन में धान की पैदावार होती है। एक किलो चावल उत्पादन में चार से पांच हजार लीटर पानी की जरूरत होती है। ऐसे में बरसात अच्छी और समय पर होगी तो पानी की भी बचत होगी। हरियाणा में भूजल की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं हैं। करनाल, पानीपत, फतेहाबाद, कैथल, कुरुक्षेत्र आदि जिलों को डार्क जोन में शामिल किया गया है। 

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात की स्थिति मानसून के आगमन के अनुकूल बनी हुई हैं। इस बार मानसून सामान्य रह सकता है। किसान भाई 15 जून से पहले धान की रोपाई ना करें। बाद में करेंगे तो मानसून का लाभ मिलेगा।

डा. डीएस बुंदेला, मौसम विशलेषक, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल

Weather

इस पर निर्भर है अच्‍छा मानसून

आउटगोगिंग लांगवेब रेडिएशन

इसमें भी 5 से 10 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70 से 75 डिग्री पूर्वी देशांतर में भी बदलाव आना चाहिए।

हवा

भूमध्य रेखा के पास हवा का दबाव 600 एचपीए (हेक्टोपस्कल प्रेशर) के आसपास होना चाहिए। 5 से 10 डिग्री उत्तर अक्षांश तथा 70 से 80 डिग्री पूर्वी देशांतर में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटा होनी चाहिए।

बरसात

यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है। जिन्हें मापने और आंकने के बाद ही मानसून की घोषणा की जाती है। केरल, लक्ष्यद्वीप तथा कर्नाटक के कुछ इलाकों के 60 फीसद क्षेत्र में लगातार दो दिन बरसात जारी रहना और 2.5 एमएम से अधिक बरसात होने के बाद ही मानसून की घोषणा की जाती है।

Posted By: Anurag Shukla

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