पानीपत (महावीर गोयल)। हुडा की भांति मार्केट बोर्ड की आर्थिक सेहत भी खराब चल रही है। मार्केट बोर्ड से सदैव अन्य विभाग कर्ज लेते थे। सरकार हुडा की भांति मार्केट बोर्ड अच्छा लाभांश देता था। मार्केट बोर्ड ने पिछले दिनों करोड़ों रुपये कर्ज लिया। अब मार्केट बोर्ड मार्केट कमेटी की के प्लाट बेचकर गुजारा कर रहा है। मार्केट कमेटी के एक्ट के मुताबिक मार्केट फीस का 30 फीसद मार्केट बोर्ड को जमा करवाना होता है। मार्केट कमेटी जो प्रापर्टी, प्लाट बेचती है। उसका 100 फीसद मार्केट कमेटी के खाते में जमा होना होता है। वर्तमान में मार्केट कमेटी की संपत्ति बिकने वाला पैसा मार्केट बोर्ड में जमा हो रहा है। मार्केट बोर्ड का काम सड़क व अन्य निर्माण कार्य करवाना होता है। पिछले काफी समय से सड़कों का निर्माण भी बहुत कम हो रहा है। अब मार्केट कमेटी के पैसे से ही विकास कार्य होंगे। मार्केट कमेटी की अनाज मंडियों सहित सब्जी मंडी में प्लाट बेचने का सिलसिला चल रहा है।

मार्केट फीस कम होने का असर

सरकार ने पिछले दिनों मार्केट फीस चार प्रतिशत से एक प्रतिशत कर दी। मार्केट फीस कम होने के कारण मार्केट बोर्ड को अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बोर्ड के आय के साधन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। यही कारण है कि बोर्ड को कर्ज तक लेना पड़ा है। मार्केट बोर्ड द्वारा प्रदेश में विकसित किए एग्रो माल भी सफेद हाथी बने हुए है। उन पर हर वर्ष लाखों रुपये मेंटेनेंस के नाम पर खर्च किया जा रहा है।

हशविप्रा भी बेच रहा प्‍लाट

यही हालत हु़डा वर्तमान में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हशविप्रा) के बने हुए हैं। हशविप्रा भी बचे हुए प्लाट बेच रहा है। नए सेक्टर विकसित न होने के कारण हशविप्रा की आर्थिक सेहत भी खराब चल रही है। हशविप्रा के सड़क लाइट आदि काम भी नगर निगम मे शिफ्ट हो चुके हैं। पार्कों के विकास पर होने वाला खर्च भी अब हशविप्रा नहीं दे पा रहा है।

Edited By: Rajesh Kumar