पानीपत/कुरुक्षेत्र, जेएनएन। Haryana Kurukshetra Gita Jayanti 2019 कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र यूं ही नहीं कहा जाता। महाभारत के युद्ध से पहले यहां भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कुरुक्षेत्र से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित ज्योतिसर वह पावन स्थल और तीर्थ है, जहां पूरे विश्व के कल्याण का सार छिपा है। जिस वटवृक्ष के नीचे भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश दिया, वह वटवृक्ष आज भी ज्योतिसर में मौजूद है। देश और दुनिया के तमाम स्थानों से यहां लोग इसके दर्शन करने आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा कि हर वर्ण को गीता पढऩे का अधिकार है। गीता किसी भी जाति और धर्म से ऊपर उठकर पढ़ी जाती है।

गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने कहा कि कुरुक्षेत्र ऐसी नगरी है, जिससे न केवल पूरे देश बल्कि हरियाणा की पहचान है। यह वटवृक्ष देश की बड़ी धरोहर है, जिसे संजोकर रखने और उसके महत्व को जन-जन तक पहुंचाने में प्रदेश सरकार के मजबूत प्रयासों की दरकार है। इस वटवृक्ष के पास ही एक सरोवर है।

गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यै शास्त्र विस्तरै

या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनिसृता

इसका मतलब यह है, गीता स्वयं पद्मनाभ भगवान श्री विष्णु के मुखारविंद से निकली हुई है। विश्व भर में एक ही पतित पावन ग्रंथ ऐसा है, जिसकी पूजा की जाती है और वह है, गीता। गीता में भगवान ने कहा है कि चाहे किसी भी वर्ण का व्यक्ति हो, वह सब मेरे ही अंश हैं। उसे श्रद्धा और भक्ति युक्त होकर इसका परायण और प्रचार करने का अधिकार है।

कुरुक्षेत्र के साथ लगती ज्योतिसर वही जगह है, जहां श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए 18 अध्याय सुनाए थे और अर्जुन को युद्ध के लिए तैयार किया था। ज्योतिसर में पुराना वट वृक्ष है। कहा जाता है कि जब अर्जुन ने अपने ही बंधु बांधवों के खिलाफ शस्त्र उठाने से इंकार कर दिया था, तब इसी पेड़ के नीचे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के 18 अध्याय सुनाए थे।

जानिए ज्योतिसर के ऐतिहासिक वटवृक्ष के बारे में

- वट वृक्ष ही गीता के संदेश का एक मात्र साक्षी है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसी वृक्ष के आगे सिर नवाते हैं।

- इसका ज्योतिसर नाम इसलिए है, क्योंकि यहां एक बड़ा सरोवर है, जिसे ज्योति सर कहते हैं। ज्योतिसर यानी ज्ञान का सरोवर।

- कुछ लोग इसे ज्योतिश्वर महादेव भी कहते हैं। यहां कभी एक प्राचीन शिव मंदिर भी हुआ करता था। ज्योतिसर का पवित्र तीर्थ स्थान सरस्वती नदी के किनारे है। यह नदी अब लुप्त प्राय है। सरकार इसकी खोज करने में जुटी है।

आदी शंकराचार्य भी आए थे गीता के बारे में चिंतन मनन करने 

- 1967 में अक्षय वृक्ष के निकट कृष्ण-अर्जुन रथ का निर्माण हुआ था।

- ज्योतिसर के परिसर में मौजूद प्राचीन शिवमंदिर के निर्माण को कश्मीर के राजा से जोड़कर देखा जाता है। आज से लगभग 155 वर्ष पूर्व कश्मीर के राजा ने इस शिव मंदिर का निर्माण कराया था

-मार्गशीर्ष एकादशी से यहां 18 दिन के मेले की शुरुआत होती है। जो व्यक्ति यहां 18 दिन गीता का पाठ करता है, वह विष्णु लोक को जाता है। 

Posted By: Anurag Shukla

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस