पानीपत/कैथल, जेएनएन। सरकारी व्यवस्था की बदहाली का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा। एक घायल तड़प तड़प कर दम तोड़ देता है, जबकि सरकारी एंबुलेंस का डीजल खत्म हो जाता। नर्स के बुलाने के बावजूद करीब पौन घंटा देरी से डॉक्टर पहुंचे। 

गुहला सरकारी अस्पताल के चिकित्सक की लापरवाही और एंबुलेंस में डीजल नहीं होने के कारण घायल खराल गांव निवासी 22 वर्षीय युवक गुरप्रीत सिंह की जान चली गई। घायल युवक को अस्पताल लेकर पहुंचे समाजसेवी नोदी चीका ने आरोप लगाया कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर नहीं थे। ड्यूटी पर तैनात नर्स ने डॉक्टर को बार-बार फोन कर बुलाया और युवक की गंभीर स्थिति को बताया बावजूद वे 45 मिनट विलंब से अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक ने औपचारिकता पूरी करते हुए मरहम-पट्टी की और गुरप्रीत को पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर कर दिया।

एंबुलेंस चालक करता रहा टाल-मटोल

नोदी चीका ने बताया कि घायल को चंडीगढ़ पीजीआइ ले जाने के लिए जैसे ही एंबुलेंस को बुलाया गया तो ड्राइवर राममेहर काफी देर तक टालता रहा, लेकिन जब उसे मरीज की हालत गंभीर होने के बारे में बताया तो उसने कहा कि उसकी एंबुलेंस में चंडीगढ़ तक जाने के लिए डीजल नहीं है। उन्होंने कहा कि डीजल वे डलवा देंगे। इस पर वह चंडीगढ़ जाने को तैयार हुआ, लेकिन तब तक गुरप्रीत दम तोड़ चुका था।

काम कर घर लौट रहा था गुरप्रीत

खराल गांव निवासी युवक गुरप्रीत सिंह रोजाना की तरह मंगलवार की रात को मोटरसाइकिल पर सवार होकर एक अन्य साथी के साथ काम से घर लौट रहा था। जब वे शहर के महावीर दल अस्पताल के पास पहुंचा तो किसी वाहन की टक्कर से बाइक से उछल कर सड़क के बीच बने डिवाइडर से टकराते हुए घायल हो गया। घायल गुरप्रीत और उसके साथी को समाजसेवी नोदी चीका ने गुहला के सरकारी अस्पताल में पहुंचाया। 

एंबुलेंस चालक राममेहर ने डीजल खत्म होने की बात कही है, जो उसकी गंभीर लापरवाही है। इसे लेकर एंबुलेंस विभाग के फिल्ड ऑफिसर व सीनियर अधिकारियों को रिपोर्ट दे दी है। चिकित्सक व स्टाफ की भी लापरवाही को लेकर जांच की जा रही है।  

- डॉ.संजीव गोयल, सीएमओ गुहला, स्वास्थ्य विभाग

Posted By: Anurag Shukla

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