जींद, [सोनू थुआ]। पशुपालन विभाग 25 अक्टूबर से पशुओं को गलघोंटू व मुंह खुर बीमारी के बचाव के लिए टीकाकरण अभियान शुरू करेगा। अभियान के तहत जिले के कुल पांच लाख 20 हजार पशुओं को टीके लगाएं जाएंगे। बता दें कि पशुपालन विभाग का पशुओं को इन बीमारियों से बचाने के लिए साल में दो बार स्पेशल टीकाकरण अभियान चलता है। छह महीने में एक बार पशु को टीका लगाया जाता है। पशु चिकित्सक इस अभियान के तहत दुधारू पशु गाय व भैंस को टीका लगाते हैं। पहला अभियान अक्टूबर से दिसंबर तक व दूसरा अभियान फरवरी से लेकर अप्रैल के करीब तक होता है। इस टीकाकरण का मुख्य उद्देश्य पशुओं को जानलेवा बीमारियों से बचाना है।

पांच लाख 20 हजार पशुओं को लगेगा टीका\\B

जिले भर में पांच लाख 20 हजार हजार पशुओं को टीका लगाया जाएगा। इसमें तीन लाख 95 हजार के करीब भैंस व एक लाख 30 हजार के करीब गाय हो टीका लगेगा।

63 टीमें गठित 

जिले में 63 के करीब टीमें गठित की गई है, जो घर- घर जाकर पशुओं को मुंहखुर व गलघोंटू जानलेवा बीमारी के बचाव के लिए टीके लगाएंगी। ताकि पशुओं को इन दोनों घातक बीमारी से बचाया जा सकें। वेटनरी सर्जन व वीएलडीए डाक्टर को इन टीमों का प्रमुख बनाया गया है।

गलघोंटू बैक्टीरिया व मुंहखुर वायरल बीमारी 

गलघोंटू बैक्टीरिया की बीमारी है। इस बीमारी में पशु की गर्दन पर सूजन आना शुरू हो जाता है। तेज बुखार आने की संभावना रहती है। सांस लेने में दिक्कत होती है। अगर समय रहते इस बीमारी का रोकथाम न हो, तो इससे पशु की जान 24 घंटों में जा सकती है। मुंहखुर वायरल बीमारी है। जिसमें मुंहखुर के बीच छाले हो जाते हैं। पशु लगड़ाना शुरू कर देता है। दूध सूख जाता है। इसलिए इस बीमारी के प्रति पशुपालकों को सचेत रहना बहुत आवश्यक है।

टीकाकरण को लेकर भ्रम न रखें पशुपालक रविंद्र हुड्डा 

टीकाकरण अभियान विभाग की तरफ से 25 अक्टूबर काे शुरू किया जा रहा है। सभी पशुपालक टीका अवश्य लगाएं। पशुपालकों में यह भ्रम है कि टीकाकरण से दूध उत्पादन में कमी आती है व गर्भपात होता है। ऐसा कुछ नहीं है। टीकाकरण से पशुओं में कई बार बुखार की शिकायत हो सकती है अथवा टीके वाले स्थान पर कभी गांठ भी बन सकती है, उससे घबराना नहीं चाहिए। टीकाकरण के समय टीके वाले स्थान पर तुरंत मालिश कर देनी चाहिए।

डा. रविंद्र हुड्डा, पशुपालन उपनिदेशक, जींद

Edited By: Anurag Shukla