पानीपत [विजय गाहल्याण]। इससे तो दोस्त भी पंगा लेने से घबराते थे। उसके मुक्के का सामना कोई नहीं कर सकता था। ये तो उसकी बुरी आदत थी जो उसे इतना बड़ा चैंपियन बना दी। वरना कौन जानता था कि गलियों और दोस्तों के साथ आए दिन मारपीट करने वाला अक्षत इतना बड़ा बॉक्सिंग का नेशनल चैंपियन होगा। जानने के लिए पढ़ें दैनिक जागरण की ये खबर।

सिवाह गांव के अक्षत कादियान(13) को बचपन से मारधाड़ पसंद थी। दोस्त भी घबराते थे कि कहीं उसके मुक्के का सामना न करना पड़ जाए। चार साल पहले रिश्तेदार अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर पवन नरवाल ने पिता संदीप कादियान को सलाह दी कि अक्षत को बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दिलाये। 

कड़ा अभ्यास किया
अक्षत ने बॉक्सिंग का कड़ा अभ्यास किया और स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में चार और नेशनल बॉक्सिंग प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीते। दो बार स्टेट बेस्ट बॉक्सर का खिताब भी जीता। गत दिनों स्टेट  बॉक्सिंग प्रतियोगिता से 25 दिन पहले अक्षत के हाथ में चोट लग गई थी। डॉक्टर ने एक महीने तक आराम करने की सलाह दी। उसने डॉक्टर की बात न मानकर अभ्यास करना जारी रखा और चोट को मात देकर प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। 

दादा हुए थे नाराज, बनाना चाहते थे पहलवान   
अक्षत ने बताया कि दादा महासिंह कादियान को कुश्ती खेल पसंद था। वे उसे पहलवान बनाना चाहते थे। उसे कुश्ती की बजाय बॉक्सिंग करना रास आता था। इसलिए उसने बॉक्सिंग खेल को चुना। इससे दादा नाराज भी हुए। पदक जीते तो दादा भी खुश हो गए। उसे पहले से ज्यादा खुराक देने लगे। बड़ा भाई अनिकेत नेशनल बॉक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुका है। भाई पढ़ाई में अच्छा है। इसलिए उसने बॉक्सिंग छोड़ दी है। भाई भी उसे तकनीक सुधार में मदद करता है। 

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सात घंटे करता है अभ्यास
संदीप कादियान ने बताया कि बेटे अक्षत को अच्छी ट्रेनिंग मिले इसी वजह से सोनीपत की लिटिल एंजल बॉक्सिंग एकेडमी में अभ्यास के लिए भेजा। अक्षत हर रोज सुबह, दोपहर और शाम को सात घंटे अभ्यास करता है। कोच रोहताश श्योराण ने बताया कि अक्षत कड़ा अभ्यास करता है। जो तकनीक उसे बताई जाती है उस पर पूरा अमल करता है। इसी वजह से वह विरोधी बॉक्सर पर जीत हासिल कर लेता है।

Posted By: Ravi Dhawan

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