जागरण संवाददाता, समालखा :

गोशालाओं में हरे चारे की समस्या बहुत हद तक दूर हो जाएगी। सरकार इसके लिए किसानों को प्रेरित कर रही है। हरा चारा उपलब्ध करवाने वाले किसानों को सरकार से प्रति एकड़ 10 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। किसी एक गोशाला के लिए किसान अधिकतम 10 एकड़ में बाजरे, ज्वार व मक्के की बिजाई कर एक लाख कमा सकते हैं। यह सुविधा केवल पंजीकृत गोशालाओं के लिए है। जिले में पंजीकृत गोशालाओं की संख्या दो दर्जन के करीब है।

उल्लेखनीय है कि आगजनी और कम पैदावार से गोशालाओं में इस बार हरे चारे की समस्या प्रबल हो गई थी। जिसे दूर करने के लिए सरकार ने हरा चारा उगाओ और अनुदान पाओ स्कीम लांच की है। किसानों को पुण्य के साथ गोसेवा का अवसर दिया है। योजना के तहत किसानों को एक एकड़ में ज्वार, मक्का व बाजरे की खेती एक साल तक करनी होगी। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के साथ गोशाला प्रबंधन से संपर्क करना होगा। प्रबंधन की मंजूरी के बाद कृषि अधिकारी मौके का फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे। फिर किसानों के खाते में रकम डाल दी जाएगी।

गोशालाओं के साथ किसान को करना होगा अनुबंध

चारा उगने वाले किसानों को पहले गोशाला से अनुबंध करना होगा। अनुबंध के आधार पर ही वे अधिकृत रकबे में चारा उगा सकेंगे। एक किसान को अधिकतम 10 एकड़ में हरा चारा उगाने की अनुमति होगी।

जिले में 190 एकड़ का हुआ है रजिस्ट्रेशन

जिले के किसानों ने योजना शुरू होने के बाद से करीब 190 एकड़ भूमि पर हरा चारा उगाने का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर करवाया है। रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 15 जुलाई तक है ।

बाक्स-गोरक्षा आयोग के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं गोशाला महासंघ के संरक्षक हरिओम तायल ने बताया कि योजना में कई कमियां है। किसान के खेत से गोशाला तक चारा कैसे आएगा इसका दिशा-निर्देश नहीं है। छोटे किसान 10 हजार के लिए जहां अपने खेत को एक साल खराब नहीं रख सकते हैं। वहीं उनके पास गोशाला तक चारा ले जाने का संसाधन भी नहीं है।

वर्जन- कृषि उपनिदेशक, पानीपत वजीर सिंह ने बताया कि योजना पुण्य के साथ अर्थ कमाने की भी है। रजिस्ट्रेशन चालू है। कोई भी किसान अपनी नजदीकी गोशाला के लिए चारा उगाने का रजिस्ट्रेशन करवा सकता है।

Edited By: Jagran