2500 रुपये की नौकरी से 70 लाख का बिजनेस... हरियाणा की पूजा शर्मा ने बाजरे-ज्वार से बनाए 70 प्रोडक्ट; खूब हो रही कमाई
पूजा शर्मा ने ₹2500 की नौकरी से शुरुआत कर बाजरा उत्पादों का सफल व्यवसाय स्थापित किया, जिससे सालाना ₹70 लाख का कारोबार होता है।
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पानीपत की पूजा शर्मा की अनाजों में विविधता से आहार बना पोषक, महिलाएं अपना रहीं जैविक खेती।
HighLights
पूजा शर्मा ने बाजरा उत्पादों से ₹70 लाख का कारोबार स्थापित किया
उन्होंने 25 महिलाओं को रोजगार दिया, 3000 को प्रशिक्षित किया
पानीपत की महिलाएं जैविक खेती अपनाकर स्वरोजगार से जुड़ रही हैं
नरेश मेहरा, पानीपत। बदलती जीवनशैली में पौष्टिक और संतुलित आहार की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे पारंपरिक मोटे अनाज पोषण के बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं। मूलरूप से झज्जर के गांव बाकरा की बेटी एवं गुरुग्राम के चंदू गांव की बहू पूजा शर्मा ने अपने नवाचार से अनाजों से खाद्य उत्पाद तैयार किए।
अनाजों का विविध उपयोग, खाद्य प्रसंस्करण और पोषण के प्रति जागरूकता आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाए। उन्होंने बाजरा, ज्वार और रागी जैसे पारंपरिक अनाजों से 70 से अधिक खाद्य उत्पाद तैयार किए और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का रास्ता दिखाया। इनसे प्रेरित होकर पानीपत की महिलाएं भी जैविक खेती कर रही हैं।
2500 रुपये की सैलरी पर करती थी काम
कभी 2500 रुपये मासिक वेतन पर काम करने वाली पूजा आज ‘क्षितिज मिलेट्स’ और ‘मिलेट माम’ ब्रांड के माध्यम से सालाना 70 लाख रुपये से अधिक का कारोबार कर रही हैं। पूजा शर्मा के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी।

खेती से पर्याप्त आय नहीं होने और पति की कमाई से परिवार का खर्च चलाने में कठिनाई के कारण उन्होंने वर्ष 2008 में एक गैर-सरकारी संगठन के तहत आंगनवाड़ी से जुड़े कार्य में 2500 रुपये मासिक वेतन पर काम शुरू किया।
रोजाना पांच किलोमीटर की यात्रा करना भी चुनौती था। करीब डेढ़ साल बाद परियोजना बंद होने से रोजगार छिन गया। इसके बाद उन्होंने गाय खरीदकर दूध बेचना शुरू किया और धीरे-धीरे आमदनी बढ़ाई।
पूजा को गुरुग्राम के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), शिकोहपुर में भुने सोया नट्स बनाने के प्रशिक्षण की जानकारी मिली। आर्थिक तंगी के कारण प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचना भी मुश्किल था। केवीके की मदद से उन्होंने प्रशिक्षण लिया और दूसरी महिलाओं के साथ बचत जुटाकर वर्ष 2013 में ‘क्षितिज’ स्वयं सहायता समूह बनाया।
पुश्तैनी जर्जर घर से सोया नट्स बनाने का काम शुरू हुआ। बाद में उन्होंने बाजरा, ज्वार और रागी से कुकीज, बिस्किट, लड्डू और नमकीन उत्पाद बनाने शुरू किए।
बाजरे के उत्पादों को मिला बाजार
पूजा ने पारंपरिक रेसिपी और खाद्य प्रसंस्करण तकनीक को जोड़कर अपने उत्पादों की विविधता बढ़ाई। कारपोरेट संस्थानों, एनजीओ और सरकारी संगठनों से आर्डर मिलने लगे। ऑनलाइन व्यवसाय भी बढ़ा।

पूजा करीब 25 महिलाओं के साथ काम कर रही हैं और अब तक लगभग तीन हजार महिलाओं को स्नैक्स व कुकीज बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उन्हें वर्ष 2021 के नारी शक्ति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
पानीपत की महिलाओं ने अपनाई जैविक खेती
पूजा शर्मा की बहन रेखा शर्मा पानीपत के इसराना गांव में हैं। करीब तीन साल पहले यहां आने पर पूजा ने जिले की कई महिलाओं से मुलाकात की थी। उन्होंने महिलाओं को अपनी संघर्ष यात्रा सुनाकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया।

उनका संदेश था कि रोजगार तलाशने के साथ रोजगार पैदा करने की दिशा में भी सोचना चाहिए। खेती को आजीविका बनाकर बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के सब्जियां व दूसरी फसलें उगाने से आमदनी के साथ आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।
केसो देवी के नेतृत्व में खेती, परिवार के पोषण पर भी जोर
पानीपत के सिवाह में महिला किसान शीला देवी के खेत पर महिलाएं मिलकर जैविक खेती कर रही हैं। डाडोला निवासी केसो देवी इस टीम का नेतृत्व करती हैं। उनके साथ डाडोला की पूनम, संजा और सैमी सहित मनाना गांव की रेखा व सीमा भी खेती में योगदान दे रही हैं।
महिलाएं पौष्टिक सब्जियां उगाकर परिवार की जरूरतें पूरी करने और आमदनी बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। शीला देवी और महिला टीम खेती व उत्पादन बढ़ाने में बड़ा योगदान दे रही हैं। यह पहल दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, सामूहिक प्रयास और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
