मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

पानीपत/कैथल, सुरेंद्र सैनी। विश्वास नहीं हो रहा, सुषमा स्वराज नहीं रहीं। उनका निधन हो गया। वो तो मेरे बच्चों के लिए भगवान थीं। उन्होंने एक मां की गुहार सुनी थी। बेटों को नई जिंदगी दी थी। ये कहना है जगदीशपुरा गांव निवासी मां बिमला देवी व पिता कृष्ण कुमार का। 

दरअसल कृष्ण कुमार ने साढ़े चार लाख रुपये ब्याज पर उठाकर घर की गरीबी को दूर करने के लिए बेटे को विदेश भेजा था। लेकिन दलाल ने धोखाधड़ी करते हुए फर्जी दस्तावेज के सहारे विदेश भेज दिया। दो माह बाद सीरिया में बेटे सहित तीन युवकों को पकड़ लिया गया। उन्हें जेल हो गई। काफी दिन बाद परिजनों को जानकारी मिली तो उन्होंने बेटे की वतन वापसी की आस छोड़ दी थी। इसके बाद चिट्ठी लिखकर सुषमा स्वराज से गुहार लगाई थी। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनके बेटे को आजादी दिलाई। 

चार लोग गए थे जॉर्डन
बेटा अरुण और इसी गांव के सर्वजीत सहित दो पिहोवा शहर निवासी जोगा सिंह और कुलदीप को 2015 में जॉर्डन भेजा गया था। फर्जी दस्तावेज की वजह से सीरिया में उन्हें पकड़ लिया गया। कृष्ण कुमार ने बताया कि बेटे से अंतिम बार 18 जनवरी 2015 को बात हुई थी, इसके बाद कोई संपर्क नहीं हो पाया। वहां जेल में उसके बेटे व साथियों को कई तरह के यातनाएं दी जाती थी, भरपेट भोजन भी नहीं मिलता था। इस कारण वे जेल में कभी रोकर तो कभी सो कर दिन-रात बिताने को मजबूर थे। 

सुषमा स्वराज के निधन से लगा झटका
युवक अरुण और सर्वजीत के परिवार के लोगों ने बताया कि बुधवार सुबह जैसे ही सुषमा स्वराज के निधन की जानकारी मिली तो विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने न सिर्फ बेटों को आजाद करवाया, बल्कि परिवार को नई जिंदगी थी। हमने तो बेटों के वापस आने की आस भी छोड़ दी थी।

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Posted By: Anurag Shukla

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