जींद, जागरण संवाददाता। जींद में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब 47 हजार किसानों ने अपनी खरीफ की फसलों का बीमा कराया है। बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी। उसके बाद बैंकों की तरफ से बीमा कराने वाले किसानों का 15 अगस्त तक डाटा अपलोड किया गया। फसलों का बीमा कराने वालों में करीब 40 हजार वे किसान हैं, जिन्होंने बैंक से ऋण लिया हुआ है। वहीं सात हजार किसान ऐसे हैं, जिन्होंने बैंक से ऋण नहीं लिया हुआ है।

पिछले साल से इस बार बीमा कराने वाले किसानों की संख्या घटी है। इसका मुख्य कारण धान की फसल में जलभराव की किसी एक किसान की शिकायत मान्य नहीं है। अगर पूरे क्षेत्र में ही जलभराव होने से धान की फसल में नुकसान होने पर ही क्लेम के लिए आवेदन स्वीकार होता है। जिस कारण धान उत्पादक काफी किसानों ने बीमा नहीं कराया। पिछले साल करीब 67 हजार किसानों ने खरीफ फसल का बीमा कराया था। जिसमें से करीब 13 हजार किसानों की फसल का मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत सरकार ने बीमा कराया था।

कपास की फसल का बीमा कराने पर जोर

कपास की फसल का बीमा कराने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है। क्योंकि कपास की फसल में जोखिम ज्यादा है। पिछले साल गुलाबी सुंडी की वजह से कपास की फसल में काफी नुकसान हुआ था। उचाना और नरवाना में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। फसल बीमा कराने किसानों का योजना का लाभ भी मिला था। पिछले साल खरीफ फसलों का बीमा कंपनी की तरफ से करीब 22 करोड़ रुपये क्लेम दिया गया था। जिसमें से नरवाना में साढ़े छह करोड़, उचाना में साढ़े सात करोड़ रुपये, जुलाना में चार करोड़ और जींद ब्लाक में ढाई करोड़ रुपये क्लेम किसानों को मिला था।

इस बार क्लेम के लिए आ चुकी ढाई हजार शिकायतें

कपास की फसल में इस बार भी ज्यादा नुकसान हुआ है। लेकिन इस बार नुकसान बीमारी की बजाय बारिश की वजह से हुआ है। फसलों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए कृषि विभाग के पास करीब ढाई हजार शिकायतें पहुंच चुकी हैं। बीमा कंपनी मौके पर जाकर सर्वे कर रही है। नुकसान का आंकलन कर किसानों को क्लेम दिया जाएगा। जिला कृषि उप निदेशक डा. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि जो शिकायतें मिली हैं, उसके सर्वे के लिए बीमा कंपनी को निर्देश दे दिए गए हैं।

Edited By: Anurag Shukla