संवाद सहयोगी, निसिंग (करनाल)। हरियाणा के करनाल के कुचपुरा में अनोखा घटनाक्रम हुआ था। यहां धरती एकाएक 10 फीट उठ गई थी। पानी उठी हुई जमीन के अंदर समा गया था। इस खेत के आसपास के खेतों के किसान अब भी डरे हुए हैं। किसान खेत में जाने से कतरा रहे हैं। उन्हें खेत के नीचे इस उथल पुथल के कारण बने दलदल की गहराई को लेकर अब भी डर सता रहा है।  

गांव कुचपुरा के किसान नफे सिंह के खेत में यह घटना हुई थी। इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। किसान ने फसल की कम पैदावार देने वाले अपने एक एकड़ खेत से मिट्टी की गहरी खोदाई करवाई थी, जिसे राइस मिल की राख से भरा गया था। उसके ऊपर एक से डेढ़ फुट मिट्टी की परत डाली गई। फिर धान की फसल रोपी गई। 13 जुलाई को हुई बरसात के बाद अधिक जलभराव हो गया। इसके बाद खेत में अचानक मोटी दरारें फट गईं। खेत का पानी नीचे चला गया और जमीन में उफान आने से टीले में तब्दील हो गई। यह घटना इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गई और इसे देखने के लिए लोग पहुंचने लगे।

कुदरत का करिश्मा करार दे रहे थे लोग

गांव के किसान नफे सिंह की धान के खेत में बने राख के टीले को इंटरनेट मीडिया पर लोग कुदरत का करिश्मा करार दे रहे थे। वहीं कुछ लोग इसे चमत्कार कह रहे थे। वायरल वीडियो देखने के बाद हर किसी के जहन में कई सवाल उठ रहे थे। इससे पहले क्षेत्र में इस प्रकार की कोई घटना नहीं देखी गई थी। कई लोगों ने इसे चमत्कार की बजाय सामान्य घटना बताया। क्षेत्रवासी किसान केहर सिंह, चरणसिंह, संदीप कुमार का कहना था कि खेत में कोई चमत्कार नहीं हुआ। चमत्कार के नाम पर अफवाह फैलाई गई।

टीम की छानबीन में यह बात आई सामने

वीडियो वायरल होने के बाद विज्ञानियों की टीम मौके पर पहुंची और छानबीन की थी। इसमें यह बात सामने आई है कि यह कोई भू-गर्भीय घटना नहीं है। दरअसल जिस जमीन पर यह घटना हुई है, उसका आस-पास के सभी खेतों से काफी निचला स्तर है। किसान ने जमीन का लेवल उठाने के लिए राइस मिल की राख डाल दी। इसके ऊपर एक फीट मिट्टी की परत डाल दी। लगातार तीन दिन तक बरसात हुई तो आसपास के खेतों का पानी भी इस खेत में एकत्रित हो गया।

इस तरह जमीन के नीचे बना पानी का दबाव

विशेषज्ञों ने बताया कि जब पानी मिट्टी के नीचे बिछाई गई राख तक गया तो वह उसे सोख नहीं पाई। राख की परत ने पानी और जमीन के नीचे के भाग को लोक कर दिया। पानी जमीन के अंदर समा नहीं पाया। इससे पानी का दबाव इतना बढ़ गया कि जमीन में दरारें आनी शुरू हो गई। पहले एक तरफ से भूमि का टुकड़ा पलट गया। उसके बाद धीरे-धीरे करीब एक एकड़ के इस क्षेत्रफल में मिट्टी काफी उथल-पुथल हो गई। विज्ञानी डा. एके राय व डॉ. परविंद्र श्योराण ने कहा कि यह कोई प्राकृतिक घटनाक्रम नहीं है।

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Edited By: Umesh Kdhyani