अंबाला, [दीपक बहल]। Indian Railway Employee Bonus News: कोरोना काल में देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है, लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए रेल मंत्रालय एक आदेश पत्र ने लाखों रेल कर्मियों में उत्पादन के आधार पर बोनस (पीएलबी) की उम्मीद जगा दी। इस आदेश पत्र में देशभर में रेलकर्मियों को 78 दिनों का बोनस देने की बात कही गई है। बादे में रेलवे ने असलियत बताई और इस तरह के पत्र को पूरी तरह फर्जी करार दिया। इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने सभी मंडलों को मैसेज भेजकर स्थिति को स्पष्ट किया है।

रेलकर्मियों को 78 दिनों का बोनस देने का रेल मंत्रालय का फर्जी आदेश सोशल मीडिया पर हुआ वायरल

उधर, ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने भी ट्वीट कर बताया कि यह पत्र पूरी तरह से फर्जी है। इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। मिश्रा ने लिखा कि जैसे ही बोनस पर कोई फैसला होगा, इसकी जानकारी रेल कर्मचारियों को दे दी जाएगी।

रेलवे बोर्ड ने सभी मंडलों को मैसेज कर असलियत से करवाया अवगत, बोनस पर स्थिति स्पष्ट नहीं

बता दें दशहरा से पहले लाखों रेल कर्मचारियों के खाते में बोनस पहुंच जाता है। कर्मियों को 78 दिनों का बोनस दिया जाता है। एक कर्मचारी के खाते में लगभग 17,951 रुपये के करीब आता है। पिछले साल वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के अनुमोदन को स्वीकृति मिलने के बाद करीब साढ़े 11 लाख कर्मचारियों को बोनस इनाम के रूप में देकर बड़ी राहत दी गई थी। ग्रुप सी और डी श्रेणी के रेलकर्मियों को 7000 की सी¨लग लिमिट के अनुसार 78 दिन का 17,951 रुपये उत्पादन के आधार पर बोनस दिया गया था।

अफसरशाही के खर्चो में हुई थी कटौती

कोरोना काल में लंबे समय तक सवारी ट्रेनों के पहिए थमे रहे और संकट की घड़ी से निपटने के लिए रेलवे ने अफसरशाही के खर्चों पर भी कटौती का फरमान जारी किया था। कर्मचारियों को घर बैठे वेतन देना पड़ा। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए इस बार कर्मचारियों को बोनस कितना दिया जाएगा या फिर कुछ और रास्ता निकाला जाएगा, इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, कर्मचारियों को महंगाई भत्ता भी जनवरी 2020 से नहीं मिल रहा है। इसी बीच शरारती तत्वों ने रेलवे के पिछले साल के बोनस की प्रतिलिपि में कुछ बदलाव कर इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

फर्जी दस्तावेज किया गया वायरल : सीनियर डीपीओ

अंबाला मंडल के सीनियर डीपीओ निखिल डोंगरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा आदेश पत्र पूरी तरह से फर्जी है। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी मंडलों को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

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