संवाद सहयोगी, कलायत (कैथल): कलायत उपमंडल के गांव खरक पांडवा निवासी जसबीर खरक करीब 20 वर्ष से विदेश में रह रहे हैं। दो दशक बाद भी इनका दिल आज भी अपने वतन की मिट्टी और गांव के जरूरतमंदों के लिए धड़कता है। जब भी गांव में किसी प्रकार का संकट आता है तो हजारों किलोमीटर दूर इटली से इनके हाथ मदद के लिए बढ़ते हैं। वैश्विक कोरोना संकट के दौरान जसबीर निरंतर अपनी माटी से जुड़े रहे। जिन परिवारों के पास भोजन की व्यवस्था नहीं थी, उन्हें जैविक विधि से तैयार खाद्य सामग्री घर पर उपलब्ध करवाई गई। इनका लक्ष्य था कि जरूरतमंद परिवार साधनों के अभाव में कोरोना महामारी के समक्ष घुटने न टेकें। जैविक खानपान मुहैया करवाने का बीड़ा गांव के एनआरआइ बेटे जसबीर खरक ने उठाया। उन्होंने अपने स्तर पर ग्रामीणों की मांग के मद्देनजर जैविक विधि से तैयार खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई। खाद्य सामग्री को हर परिवार की चौखट पर पहुंचाने की जिम्मेदारी जय बाबा पागल पीर सेवा समिति ने कुशलता से संभाले रखी। समिति की टीम के सदस्य व्यवस्थित तरीके से राशन को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में लगे रहते थे ताकि लोग घरों में रहे और लॉकडाउन में किसी प्रकार की समस्या न आए। उन्होंने कोरोना काल में गांव खरक पांडवा के जरूरतमंदों की मदद की और उसके बाद आसपास के लोगों के लिए राहत भेजी। जसबीर खरक ने बताया कि रोजगार की तलाश के लिए उन्होंने विदेश जाने का निर्णय लिया था। उन्नति का मुकाम हासिल करने के बाद उनका ध्येय दूसरे युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ विपरीत परिस्थितियों में लोगों की मदद करना रहा। इस मिशन को गतिमान करने में बुजुर्ग पिता बलजीत ¨सह, भाई रामनिवास खरक, रामेमहर, जसमेर और हर वर्ग को कदम-कदम पर मार्ग दर्शन मिला। बॉक्स :कर्म और जन्म भूमि के प्रति संजीदगी जरूरी एनआरआइ जसवीर खरक का कहना है कि परिवार की भांति विदेश में रहते हुए इलाके की खुशहाली और स्वास्थ्य के प्रति संजीदगी महसूस होती है। संकट काल में कर्म और जन्म भूमि के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करने से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। केंद्र एवं राज्य सरकार ने जरूरतमंद परिवारों का भोजन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वित करती है। इस दिशा में सामाजिक संगठनों के सहयोग की आवश्यकता रहती है। इसी सोच को वे सदैव आत्मसात रखते हैं।

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