जागरण संवाददाता, पानीपत: वार्ड-8 स्थित शहर के मुकुट ऐतिहासिक किले पर चारों तरफ से अवैध कब्जे किए जा चुके हैं। आनंदपुर ट्रस्ट के सामने किले से सटाकर बल्ली, ईट और रेत डाला गया है। नीचे से मिंट्टी का भी खनन करके नींव को खोखला बनाया जा रहा है। इसमें लगी ईटें भरभरा कर गिर चुकी हैं। यही हालात रहे तो किला किसी दिन ढह भी सकता है। किले के नवीनीकरण पर सवा करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसका शिलान्यास भी किया जा चुका है। सवाल ये है कि जब किला ही नहीं बचेगा तो फिर इस पर लगाए जाने वाले झूले, फव्वारे और पार्क की हरियाली कहां टिकेगी। किले को महफूज रखने के जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारियों को फुर्सत नहीं कि वे किले के पास पड़े गोबर के ढेर और अवैध कब्जों को हटा सकें। शहरवासी किले की इस दुर्दशा के लिए नगर निगम के अधिकारियों और सत्ता में रहे पूर्व व मौजूदा नुमाइंदों को जिम्मेदार मान रहे हैं। लोगों की मांग है कि पहले चारदीवारी कर ढहते हुए किले को बचाया जाएगा। इसके बाद ही नवीनीकरण कराया जाए।

20 फीट मिंट्टी की कर दी खोदाई

किले के पास परमहंस कुटिया क्षेत्र में रहने वाले अनिल वर्मा ने बताया कि पांच साल के भीतर किले की करीब 20 फीट क्षेत्र की मिंट्टी का खोदाई कर दी गई। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। ऐसे ही मिंट्टी का कटान होता रहा है तो इसका वजूद बचाना मुश्किल हो जाएगा। प्रशासन को जागना होगा। किले के अवैध कब्जों को हटाया जाए।

राजनेताओं के संरक्षण में उजड़ रहा किला

समान नागरिक संहिता मंच के संयोजक नेमचंद जैन का कहना है कि किला शहर की शान है। नगर निगम, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं के संरक्षण में किला के चारों ओर कब्जे हैं। ये कब्जाधारी किले को नोच रहे हैं। यही स्थिति रही तो किला का वजूद नहीं बचेगा। किले के चारों तरफ दीवार का निर्माण कराया जाए। इससे मिंट्टी का कटान तो रुकेगा। तभी किला का नवीनीकरण करवाना सार्थक होगा।

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