पानीपत, जेएनएन। पश्चिम बंगाल में चिकित्सकों के साथ हुई हिंसा के विरोध मेंंइंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर प्राइवेट और सरकारी डॉक्टर ओपीडी सेवाएं बंद कर सड़क पर उतर आए। ओपीडी बंद रहने से करीब 40 हजार मरीजों को सामान्य इलाज नहीं मिल सका।

हड़ताल के समर्थन में सभी डॉक्टर सुबह करीब साढ़े नौ बजे स्काईलॉर्क में एकत्र हुए। मैं आतंकवादी नहीं एक डॉक्टर हूं..डॉक्टरों पर हिंसा अत्याचार बंद करो जैसे स्लोगन लिखे बैनर लेकर जीटी रोड पर बस स्टैंड तक जुलूस निकाला। इसके बाद, लघु सचिवालय के सामने, फ्लाईओवर के नीचे एकत्र हुए। चिकित्सकों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ करीब 10 मिनट तक नारेबाजी की।

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इन्होंने किया हड़ताल का समर्थन
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए), पानीपत के करीब 375 सदस्य हैं। सभी ने सोमवार की सुबह से ही ओपीडी बंद कर दी।
-नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा), पानीपत के करीब 40 डॉक्टरों ने भी हड़ताल का समर्थन किया।
-हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचएसएमएसए) के सदस्यों भी डीजी हेल्थ के आदेशों को दरकिनार कर सिविल अस्पताल सहित सीएचसी-पीएचसी में ओपीडी बंद रखी।
-इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सदस्य भी हड़ताल का समर्थन किया।
-इनरव्हील क्लब, रोटरी क्लब और हरियाणा मेडिकल प्रतिनिधि संघ ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है।

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ऐसे ही हालात रहे तो डॉक्टर और मरीजों के बीच बढ़ेगा अविश्वास
लघु सचिवालय में हुई जरनल बॉडी मीटिंग में चिकित्सकों ने एकमत से कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। हालात ऐसे ही रहे तो डॉक्टर और मरीजों के बीच अविश्वास की खाई पैदा हो जाएगी। कोई डॉक्टर गंभीर मरीज और घायल को भर्ती भी नहीं करेगा। बैठक को आइएमए पानीपत की प्रधान डॉ. अंजलि बंसल, महासचिव डॉ. मोहित बंसल, डॉ. अर्चना गुप्ता, नीमा पानीपत के प्रधान डॉ. दीपक गुप्ता, एचएसएमएसए पानीपत के प्रधान डॉ. नारायण डबास आदि ने संबोधित किया।

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ये डॉक्टर हड़ताल में हुए शामिल
विरोध प्रदर्शन में डॉ. कश्मीरी लाल, डॉ. श्यामलाल, डॉ. गौरव श्रीवास्तव, डॉ. मोहित आनंद, डॉ. दीपक भारद्वाज, डॉ. वंदना पाहूजा, डॉ. अनिल अरोड़ा, डॉ. तुषार कालरा, डॉ. आशुतोष कालरा, डॉ. देवेंद्र बतरा, डॉ. आरपी जिंदल, डॉ. शबनम बतरा, डॉ. रमेश छाबड़ा, डॉ. गिरीश अरोड़ा, डॉ. रिंकु सांगवान, डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोडिया, डॉ. श्यामलाल, डॉ. राघवेंद्र, डॉ. सुखदीप कौर, डॉ. शशिलता सहित करीब 200 डॉक्टर मौजूद रहे।

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हम मर जाएंगे तो इलाज कौन करेगा नाटक देख फूट-फूटकर रोई डॉ. वंदना
थियेटर आर्ट ग्रुप के सदस्यों ने हम मर जाएंगे तो इलाज कौन करेगा स्क्रिप्ट पर नाटक मंचन किया। नाटक में दिखाया गया कि चिकित्सक दंपती के बच्चे पिकनिक पर जाने वाले हैं, तभी इमरजेंसी कॉल पर अस्पताल जाना पड़ता है। पिकनिक का प्लान रद होते देख बच्चे रोने लगते हैं। दूसरे सीन में डॉक्टर आराम करने के लिए लेटता है। तभी एक्सीडेंट में दो युवकों के घायल होने की सूचना पर दौड़कर अस्पताल पहुंचना पड़ता है। एक युवक को डॉक्टर बचा लेता है दूसरे की मौत हो जाती है। जीवित युवक का पिता पूछता है कि ऑपरेशन सफल है तो उदास क्यों हो, तब डॉक्टर बताता है कि मरने वाला उसका बेटा है। इस सीन को देखकर कई डॉक्टरों की आंखें नम हो गई, डॉ. वंदना पाहूजा फूट-फूटकर रोने लगीं।

इमरजेंसी देख दौड़े डॉक्टर
सिविल अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोडिया, डॉ. नारायण डबास, डॉ. राजीव मान, डॉ. रिंकू सांगवान, डॉ. राघवेंद्र स्काईलॉर्क के लिए निकले। इस बीच, जगदीश नगर निवासी काजल को इमरजेंसी में लाया गया। कॉल किसी एक डॉक्टर को आई लेकिन सभी एक साथ दौड़ पड़े। काजल को सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत थी, उसे ऑक्सीजन लगाई गई। बाद में राजीव मान बोले मैं आज इमरजेंसी में रहूंगा बाकी लोग जा सकते हैं।

क्या कहते हैं चिकित्सक
डॉक्टरों के साथ हिंसा के खिलाफ बने सेंट्रल एक्ट मरीजों को दिक्कत हो, कोई डॉक्टर नहीं चाहता लेकिन जब डॉक्टर सुरक्षित नहीं तो इलाज कैसे होगा। बात सिर्फ पश्चिम बंगाल की नहीं है। डॉक्टरों के साथ हिंसा न हो, इसके लिए सेंट्रल एक्ट बनाना चाहिए। हरियाणा में मेडिकल केयर एक्ट बना है लेकिन ठीक से लागू नहीं है। पुलिस भी डॉक्टरों के प्रति संवेदनशील नहीं है।
डॉ. अंजलि बंसल, प्रधान-आइएमए पानीपत

मुद्दा डॉक्टरों की सुरक्षा है
आइएमए की हड़ताल को देखते हुए डीजी हेल्थ के निर्देश थे कि संत कबीर दास जयंती के अवसर पर अवकाश के दिन भी ओपीडी खुली रखनी है लेकिन, हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन भी ओपीडी बंद रखने का निर्णय ले चुकी थी। मुद्दा डॉक्टरों की सुरक्षा का है। सिविल अस्पताल में चौकी खोली गई थी, बंद हो चुकी है।
डॉ. नारायण डबास, अध्यक्ष-एचएसएमएसए पानीपत

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मरीजों का दर्द
कई दिन से बुखार और पेट में दर्द है। सिविल अस्पताल आने के लिए सुबह ही घर से निकला था। यहां आकर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। विष्णु नौल्था चार वर्षीय आतिश गंभीर रूप से बीमार है। पहले से इलाज चल रहा है। हड़ताल का पता नहीं था, अब घर लौटना ही ठीक रहेगा। दिहाड़ी छोड़कर मंगलवार को फिर आना होगा। नरेश, कच्चा कैंप

पहले से ही अपाहिज हूं, कुछ दिन पहले गिर गया था। कमर में चोट लगने से तेज दर्द है। डॉक्टर को दिखाकर एक्स-रे कराना था। दोनों काम नहीं हुए।
राम निवास, पूंडरी

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