पानीपत, जेएनएन - कल विश्व सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) दिवस है। प्रत्येक वर्ष नवंबर के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में आठ करोड़ से अधिक लोग इस रोग की चपेट में आ चुके हैं। सिविल अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में रोजाना 20 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। धूम्रपान, उद्योगों की चिमनियों से निकलता धुअसं, कंस्ट्रक्शन साइट्स का धूल प्रदूषण और धूम्रपान इस रोग की बड़ी वजह हैं।

अस्पताल के फिजिशयन कंसल्टेंट डा. जितेंद्र त्यागी ने बताया कि सीओपीडी को सामान्य भाषा में दमा का बिगड़ा रूप कहना ठीक होगा। बीमारी से होने वाली मौतों में सीओपीडी तीसरे नंबर पर है। हरियाणा में बीड़ी-सिगरेट पीना, हुक्का पीने का लोग खूब शौक रखते हैं। मीडियम साइज की एक सिगरेट पीने से व्यक्ति की आयु पांच मिनट कम हो जाती है। इसमें मुख्यत: निकोटिन, तार, कार्बन मोनोक्साइड, आरसेनिक, कैडमियम जैसे हानिकारक तत्व होते हैं। लकड़ी-गोबर के ईंधन, फसल अवशेषों को जलाने से निकलने वाला धुआं सीओपीडी को बढ़ावा देता है।  

यह श्‍वास की बीमारी 

डा. त्यागी के मुताबिक यह श्वास की बीमारी है, अनुवांशिक भी है। फेफड़ों में संक्रमण के कारण होती है। यह एकदम नहीं बल्कि धीरे-धीरे बढ़ने वाला रोग है। श्वास रोगी 15-20 सीढ़ी चढ़ते हुए हांफने लगे तो समझ लेना चाहिए कि सीओपीडी की चपेट में है। 

मरीज इनहेलर रखें साथ 

सीओपीडी मरीजों का प्राथमिक इलाज इनहेलर पद्धति से किया जाता है। इनहेलर कई प्रकार के होते हैं, इनमें दवाइयां मिली होती हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से ही इनहेलर लें। मरीज हर समय इनहेलर साथ रखे, सांस फूलने पर मुंह में स्प्रे करें।

सीओपीडी की चार स्टेज 

पहली स्टेज में सुबह के समय खांसी आना और गले में खिचखिच होना होता है। दौड़ते, परिश्रम करते जल्द श्वास फूलने लगे तो बलगम के साथ खांसी दूसरी स्टेज है। घर में रोजमर्रा के कार्य जैसे नहख, कपड़े पहनने में भी श्वास फूलती है तो तीसरी स्टेज और स्थिति चिंताजनक। श्वास कठिनाई से आए, खांसी बंद न हो, हाथ-पैर में सूजन चतुर्थ श्रेणी में आता है।

सीओपीडी के लक्षण 

  • खांसी-जुकाम व फ्लू
  • सांस लेने में दिक्कत
  • सीने में जकड़न
  • श्वास प्रणाली में संक्रमण
  • फेफड़ों का कैंसर
  • पैरों में सूजन
  • -वजन घटना

Edited By: Ravi Dhawan

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