पानीपत, [महावीर गोयल]। आर्थिक मंदी के बीच कारपेट उद्योग के लिए राहत देने वाली खबर है। इस बार कारपेट निर्यात 10 फीसद तक बढऩे की उम्मीद है। इसके लिए निर्यातक पुराने बाजारों के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों में बाजार तलाश रहे हैं। वर्ष 2018-19 में 12000 करोड़ का कारपेट निर्यात हुआ है। उत्तर प्रदेश के भदोई के बाद पानीपत कारपेट निर्यात में देश में दूसरे स्थान पर है। करीब 12000 करोड़ के निर्यात में चार से पांच हजार करोड़ का हिस्सा पानीपत का है। मशीनमेड कारपेट से हस्तनिर्मित कारपेट की स्पर्धा है। 

हमारे कारपेट की तुलना में टर्की में निर्मित मशीनमेड कालीन बहुत सस्ता पड़ता है। टर्की सिंथेटिक कारपेट बनाकर पूरे देश में डंप कर रहा है। सिंथेटिक यार्न से निर्मित होने के कारण यह कारपेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उसे रोकने के हम ऊन, काटन, हेंप, बंबू, सिल्क, जूट, क्वायर और सिल्क से कारपेट बनाते हैं। लोगों को चाहिए कि वह सस्ते के फेर में न पड़कर अपने देश का कारपेट प्रयोग करें। 

500 से अधिक उद्योग

पानीपत में 500 से अधिक कारपेट उद्योग हैं। इनमें हजारों लोगों को रोजगार मिला है। ऐसे उद्योगों के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की मांग लंबे समय से चल रही है। कलस्टर बनाने की मांग भी है। साथ ही यहां एक इंस्टीट््यूट खोलने की मांग है। जिसमें कारपेट के नए डिजाइन सिखाने की व्यवस्था हो। लोकल में बेचने के लिए कारपेट से जीएसटी हटाने की मांग भी उठती रहती है।

60 फीसद महिलाओं को रोजगार 

कारपेट उद्योगों में 60 फीसद महिलाओं को भी रोजगार मिला हुआ है। महिलाएं हाथ से कारपेट बना रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि मशीन मेड कारपेट पर 150 फीसद शुल्क लगना चाहिए। जिससे हमारे देश का उत्पाद व कुटीर उद्योग बच सकेगा। 

बीडी का जलवा, मशीन मेड कारपेट डंप 

व्यापारिक भाषा में बांगला देश को बीडी कहा जाता है। वाया बीडी के मशीन मेड कारपेट के अलावा अन्य टेक्सटाइल सामान जो चीन में बनते हैं वे देश में डंप हो रहे हैं। इसका नुकसान यहां के उद्योगों को उठाना पड़ रहा है। 

पानीपत के निर्यातक नए देशों में बाजार तलाश रहे हैं। नए बाजार मिलने पर विश्व बाजार में 50 फीसद हिस्सेदारी प्राप्त करने में सफल हो सकेंगे। 10 फीसद कारपेट का निर्यात इस वर्ष भी बढऩे की उम्मीद है। सरकार को निर्यात बढ़ाने में सहयोग देना होगा। 

अनिल मित्तल, प्रधान, पानीपत कारपेट एक्सपोर्ट एसोसिएशन।

स्टेट जीएसटी वसूली में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी

देश में जीएसटी वसूली में भले की कमी दर्ज की गई हो, लेकिन पानीपत में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है।  अप्रैल से लेकर अक्टूबर 2018 की तुलना में यह वृद्धि दर्ज हुई है। अक्टूबर 18 तक पानीपत में 314 करोड़ 79 लाख रुपये जीएसटी वसूल किया गया था। यह वसूली आईओसीएल रिफाइनरी को छोड़कर है। इस वर्ष अप्रैल से अक्टूबर तक रिफाइनरी की रिकवरी को छोड़कर लोकल मार्केट से 412 करोड़ 85 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। इस प्रकार सात माह में 98 करोड़़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिल चुका है। 

Panipat में 47 सौ करोड़ से अधिक टैक्स वसूली

पानीपत में 4700 करोड़ से अधिक की टैक्स वसूली होती है। ज्यादातर टैक्स का हिस्सा रिफाइनरी से मिलता है। पहले 100 करोड़ के आसपास ही वैट टैक्स मिलता था जो अब जीएसटी लागू होने के बाद से बढ़ता जा रहा है। हैंडलूम कपड़ा, कंबल, रजाई, चादर आदि पर जीएसटी लागू होने का फायदा विभाग को मिल रहा है। टैक्स में बढ़ोतरी का दूसरा कारण जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच को माना जा रहा है। जांच के बाद से व्यापारियों ने अब टैक्स भरने पर जोर देने शुरू कर दिया है। उपआबकारी कराधान आयुक्त आरआर नैन का कहना है कि सात माह में रोड साइड चेकिंग अभियान में 211 गाडिय़ां पकड़ी गई है। इन पर पांच करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। 

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