जागरण संवाददाता, पानीपत : डालर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन होना हानिकारक नहीं है। घरेलू उत्पाद को बढ़ाने की जरूरत है। निर्यात ज्यादा होगा तो रुपया मजबूत होगा। सेक्टर 29 पार्ट-2 स्थित दैनिक जागरण कार्यालय में सोमवार को जागरण विमर्श कार्यक्रम में यह बात विषय विशेषज्ञ सीए शशि चड्ढा ने कही।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार तभी आएगा जब हमारी क्रय शक्ति बढ़ेगी। डालर और रुपया के भाव में अंतर कोई नई बात नहीं है। छह सात वर्ष पहले एक डालर 48 से 50 रुपये का होता था। अब 72 रुपये को छू रहा है। मांग और आपूर्ति पर कोई चीज निर्भर करती है। डालर की भी यही स्थिति है। निर्यात ज्यादा होगा तो हमारे पास डालर आएगा। रुपये का अवमूल्यन रोकने के लिए यही एक उपाय है।

उन्होंने कहा कि तेल और सोने के दामों में उछाल आना डालर की मजबूती का एक बड़ा कारण है। देश में तेल के कुल खपत का 83 फीसद आयात किया जाता है। डालर और रुपये में संतुलन बनाए रखने के लिए तेल का विकल्प हमें खोजना होगा। सौर ऊर्जा इसका अच्छा विकल्प हो सकता है। परमाणु ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है।

सीए शशि चड्ढा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का भाव 80 रुपये प्रति बैरल पहुंच जाने से उपभोक्ता सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ रही है। तेल का बाजार स्थिर है। उसी दाम पर सभी देशों को आयात होता है। अपने देश में सस्ता कहां से बिकेगा। सरकार सब्सिडी देगी तभी पेट्रोल-डीजल का दाम कम हो सकता। एक्साइज डयूटी कम करने पर भी रेट घटाया जा सकता है।

तो महंगाई नहीं रहेगी

सीए शशि ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य दो ऐसे सेक्टर हैं जहां सुधार की जरूरत है। व्यक्ति अपनी कमाई का सबसे ज्यादा भाग इन्हीं दो सेक्टरों पर खर्च करता है। सरकार इन दो सेक्टरों पर विशेष ध्यान दे तो देश में महंगाई नहीं रहेगी। आयुष्मान भारत योजना इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।

मेक इन इंडिया क्यों सफल नहीं

मेक इन इंडिया की सफलता पर पूछे गए प्रश्न में सीए शशि चड्ढा ने कहा कि सरकार योजना बनाती है। ब्यूरोक्रेटस उसे सफल नहीं होने देते हैं। पब्लिक तक उस योजना की जानकारी नहीं पहुंचाते हैं। ग्रांट का सदुपयोग न होने से राशि वापस हो जाती है। सरकार की पॉलिसी को ब्यूरोक्रेटस ही सफल बना सकते हैं।

कैसे हो सकता है सुधार

-किसी कार्य को इंडस्ट्री मानकर चलें।

-तेल के दाम को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व विदेशी मुद्रा को बाजार में चलन में लाएं। लेकिन इसमें रिस्क है। भविष्य में इससे कोई बड़ी जरूरत पड़ने पर कहां से डालर लाएंगे।

-भारत में आयात-निर्यात ज्यादा कर है। इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बना कर इसे सुधार सकते हैं।

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ये प्रश्न पूछे गए

-डालर महंगा क्यों हो गया।

-रुपये के अवमूल्यन में भ्रष्टाचार कितना जिम्मेदार है।

-विदेशी निवेश से रुपये पर कुछ फर्क पड़ेगा।

-तेल के दाम बढ़ने से सामानों के दाम बढ़ेंगे।

परिचय :

नाम : शशि चड्ढा

निवासी : मॉडल टाउन

प्रोफेशन : चार्टर्ड अकाउंटेंट

Posted By: Jagran