करनाल, जागरण संवाददाता। करनाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू पर नियंत्रण करने में मुश्किल हो रही है। विभाग के अधिकारियों को गंभीर होना होगा क्योंकि शुक्रवार को मिले दस नए मामलों के साथ अब जिले में 243 मरीज डेंगू से पीड़ित हैं। कोरोना के कहर में हांफने वाली व्यवस्था को अब डेंगू ने बीमार कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की डेंगू जांच के लिए टेस्ट सुविधा नहीं है। चिकित्सक लक्षणों के आधार पर निजी लैब पर मरीजों को भेज रहे हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग का अभियान जागरूकता कार्यक्रम के अलावा फागिंग की योजना में कमजोर दिखाई पड़ रहा है। अगर स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर होती तो शायद मरीजों की संख्या बढ़ने से रोकी जा सकती थी।

शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में मरीज

शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार शहरी के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में डेंगू से लोग प्रभावित हुए हैं। दस नए मामलों में चार करनाल, एक असंध, घरौंडा, इंद्री, नीलोखेड़ी, दो निसिंग में मरीज मिले हैं। मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की कमजोर व्यवस्था के कारण बीमारी के साथ सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। अधिवक्ता मुकेश कुमार के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कयास लगा रहे थे कि सर्दी बढ़ने के बाद डेंगू का डंक कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

लगभग डेढ़ माह से सरकारी व निजी अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती का नतीजा है कि निजी अस्पतालों में डेंगू के डर की कीमत वसूली जा रही है। बेशक हल्की सख्ती के कारण सरकारी अस्पतालाें में जांच के लिए मरीजों को भेजा जा रहा है लेकिन मरीजों की जेबों पर बोझ को कम करने में जिला प्रशासन अधिकारी कार्रवाई के नाम पर सीमित हैं।

मरीजों को उचित सुविधा दी जा रही है

सिविल सर्जन योगेश शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को दस नए मरीज मिले हैं। अस्पतालों में मरीजों को उचित सुविधा दी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिकित्सक डेेंगू के लक्षण दिखने पर उचित कदम उठा रहे हैं।

Edited By: Rajesh Kumar