यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हरियाणा में डीएपी खाद की किल्लत, कैथल में किसानों ने पकड़ी कालाबाजारी
हरियाणा में डीएपी खाद की किल्लत बढ़ने के साथ कालाबाजारी बढ़ रही है। कैथल में गोदाम में 134 डीएपी खाद ...और पढ़ें

कैथल, जागरण संवाददाता। डीएपी के स्टाक और कालाबाजारी को लेकर अफसरों के सारे दावे खोखले साबित हुए। डीएपी खाद को लेकर मारामारी चल रही है, लेकिन खाद विक्रेता इसका स्टाक करने में जुटे हैं। शनिवार को नई अनाज मंडी के नजदीक एक फर्म के गोदाम में 134 डीएपी खाद के कट्टे मिले। किसानों ने इस स्टाक को पकड़ कर कृषि विभाग एसडीएम डा. संजय कुमार को सूचना दी। इसके बाद मौके पर नई अनाज मंडी पुलिस चौकी इंचार्ज संजय कुमार, कृषि विभाग के क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर डा. महावीर सिंह सोढी मौके पर पहुंचे। किसानों ने प्रशासन के खिलाफ रोष जताया। विभागीय अधिकारियों पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया।
किसानों ने कहा कि एक तरफ तो डीएपी खाद को लेकर मारामारी हो रही है, लेकिन दूसरी तरफ खाद विक्रेता गोदामों में स्टाक कर रहे हैं। यह कालाबाजारी है, जो बाद में इसे महंगे दामों पर किसानों को बेचा जाएगा। किसानों ने कहा कि खाद विक्रेता फर्म का लाइसेंस रद करते हुए एफआइआर दर्ज की जाए। किसानों के रोष को देखते हुए अधिकारियों ने गोदाम खुलवाकर 134 खाद के कट्टों का वितरण करवाया। प्रति किसान एक-एक कट्टा दिया गया। पुलिस की मौजूदगी में खाद बांटा गया। बता दें कि शुक्रवार को भी किसानों ने 170 डीएपी खाद के कट्टों का स्टाक पकड़ा था। उक्त खाद भी नई अनाज मंडी पुलिस चौकी में बांटा गया था। एक किसान को दो कट्टे खाद के दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद काफी किसान बिना खाद के ही वापस लौटे थे।
खाद की हो रही कालाबाजारी : होशियार गिल
चढूनी गुट के भाकियू जिलाध्यक्ष होशियार गिल ने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा हो रहा है। खाद की कोई कमी नहीं है, डीएपी खाद का स्टाक किया जा रहा है, ताकि इसे ज्यादा दामों में बेचा जा सके। अब सरकार की तरफ से प्रति कट्टा 1200 रुपये निर्धारित किया गया है, लेकिन इसे ज्यादा दामों में बेचा जा रहा है। किसान 1500 से 1600 रुपये प्रति कट्टा खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी कहते हैं कि एक भी कट्टा डीएपी का नहीं है, लेकिन यहां खाद कैसे आ गया। गोदाम भरे पड़े हैं और किसानों को बांटा नहीं जा रहा है। किसानों ने जब आधा घंटे का अल्टीमेटम प्रशासन को दिया तो इसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे। किसानों ने कहा कि अगर कोई भी अधिकारी या फर्म का मालिक यहां मौके पर नहीं पहुंचा तो वह गोदाम का ताला तोड़ कर खाद के कट्टों का किसानों में वितरण कर देंगे और प्रति कट्टा 1200 रुपये किसानों से लेकर फर्म मालिक को दिया जाएगा, अगर कोई पैसा नहीं लेना आए तो यह पैसे किसान आंदोलन में बार्डर पर दे दिए जाएंगे।
आसपास के गोदाम खोलते रहे, लेकिन जिस गोदाम में डीएपी रखा था वह खोला काफी लेट
किसानों को गुमराह करने के लिए आसपास के गोदाम खोलकर किसानों को दिखाए गए। एक गोदाम में यूरिया खाद मिला, लेकिन किसान बोले जिस गोदाम में डीएपी खाद रखा हुआ है, वह तो खोला नहीं जा रहा है। जब किसानों ने रोष प्रदर्शन करना शुरू किया तो कृषि अधिकारियों ने फर्म मालिक को बुलाया। इसके बाद गोदाम खोला तो उसमें से डीएपी खाद के कट्टे मिले। किसानों की लाइन लगवाते हुए उक्त खाद को वितरण किया गया। इसके बाद किसानों ने राहत की सांस ली। किसानों ने का कहा कि गेहूं बिजाई का समय चल रहा है, लेेकिन खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
कृषि उप निदेशक डा. कर्मचंद ने कहा कि नक्ष ट्रेडिंग फर्म के मालिक ने डीएपी खाद का स्टाक किया हुआ था। इसकी सूचना विभाग को नहीं दी। सूचना न देना बड़ी लापरवाही है। गोदाम में 134 डीएपी के कट्टे मिले हैं। किसानों में वितरण करवा दिया है। फर्म मालिक के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए पुलिस में शिकायत दी गई है।
