पानीपत, जेएनएन। डॉक्‍टर की लापरवाही की वजह से एक बच्‍चे की अंगुली काटनी पड़ गई। मामला उपभोक्‍ता फोरम तक पहुंचा। फोरम ने हाथ की अंगुली गंवाने के मामले में शहर के एक अस्पताल संचालक चिकित्सक व बीमा कंपनी को पीडि़त बच्चे को दो लाख रुपये का हर्जाना देने के निर्देश दिए हैं। इसके  साथ ही उन्हें बच्चे के परिवार को 20 हजार रुपये मानसिक प्रताडऩा के लिए के देने होंगे। वहीं चिकित्सक का कहना है कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और आगे अपील दायर करेंगे।

कुरुक्षेत्र के हरपाल सिंह ने बताया कि उसके आठवीं में पढऩे वाले 14 वर्षीय बेटे राजन की बाएं हाथ की पहली अंगुली में दो अक्टूबर 2016 को चोट लग गई थी। वे एक निजी अस्पताल में बच्चे का उपचार कराने के लिए पहुंच गए। वहां चिकित्सक ने जांच के बाद उसके बेटे के हाथ की अगुंली में उपचार करके वायर डाल दी। शिकायतकर्ता का कहना है कि चिकित्सक के उपचार के बाद बेटे की अंगुली में इंफेकशन बढ़ता गया। इस संबंध में कई बार उक्त चिकित्सक के चक्कर काटे, हर बार वे देखकर जल्द ठीक होने का आश्वासन देते रहे। मगर उसके बेटे की अंगुली नीली पड़ती गई। उन्होंने दूसरे चिकित्सक से परामर्श लेने का फैसला किया और एक दूसरे निजी अस्पताल में बच्चे का उपचार कराने ले गए। जहां इंफेकशन ज्यादा होने पर दूसरे चिकित्सक को बेटे की अंगुली काटनी पड़ी।

बोर्ड ने भी लापरवाही मानी
हरपाल ने दावा किया कि सीएम विंडो पर शिकायत के बाद चिकित्सकों के बोर्ड ने भी लापरवाही मानी। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम में अपील की जहां जिला उपभोक्ता फोरम की अध्यक्षा नीलम कश्यप, सदस्य सुनील मोहन त्रिखा व नीलम तीनों ने मामले में साक्ष्यों व गवाहों की आधार पर पीडि़त बच्चे के हक में दो लाख रुपये की एफडी कराने और 20 हजार रुपये हरासमेंट के देने के निर्देश दिए हैं।

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