जागरण संवाददाता, पानीपत : नूरवाला, धमीजा कालोनी में तीन दिन पहले 10 वर्षीय बच्ची सीढि़यों से गिर गई थी। स्थानीय चिकित्सक से इलाज कराया, वह ठीक हो गई थी। शनिवार को वह घर में बेहोश होकर गिर पड़ी। स्वजन उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। चिकित्सक ने बच्ची को कोरोना आशंकित बताकर, पीजीआइ रोहतक रेफर कर दिया। नानी और मां करीब 15 मिनट तक गिड़गिड़ाती रहीं, बच्ची को भर्ती नहीं किया। सिविल सर्जन डा. संजीव ग्रोवर ने इमरजेंसी के स्टाफ को फटकार लगाई, तब उसे भर्ती किया गया।

लखनऊ निवासी गीता, 10 वर्षीय बेटी सृष्टि के साथ मायका धमीजा कालोनी आई हुई है। वीरवार को सृष्टि सीढि़यों से गिर गई थी। सिर, छाती में गुम चोट लगी थी। कालोनी स्थित एक डाक्टर ने प्रारंभिक इलाज दिया। शनिवार को बच्ची पुन: बेहोश होकर गिर गई। गीता व उसकी मां बेहोश बच्ची को लेकर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। बच्ची को रोहतक पीजीआइ रेफर कर दिया। स्वजनों ने पीजीआइ में पता किया तो बेड खाली नहीं बताए।

उधर, बच्ची की सांसें उखड़ रही थी। गीता हाथ जोड़कर बेटी को बचाने की गुहार लगाती रही। कार में नानी, सृष्टि को लिए बैठी रोती रही। मीडियाकर्मियों ने मामले की सूचना सिविल सर्जन को दी। उनके हस्तक्षेप से बच्ची को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। वार्ड में बेड खाली नहीं होने के कारण बच्ची के कुर्सी पर बैठाकर, आक्सीजन दी गई। स्टाफ को दी चेतावनी :

सिविल सर्जन डा. संजीव ग्रोवर ने जागरण को बताया कि इमरजेंसी वार्ड में बच्ची को भर्ती करने से इन्कार का मामला संज्ञान में आया था। चिकित्सक और स्टाफ को चेतावनी दी गई है कि ऐसा प्रकरण न दोहराया जाए। कोविड-19 पॉजिटिव हो या दूसरा मरीज, दिक्कत नहीं आनी चाहिए।

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