जागरण संवाददाता, पानीपत : विधानसभा चुनाव 2019 को लेकर कांग्रेस में टिकट को लेकर ताना बाना बुना जाने लगा है। स्टेट लेवल पर कार्यकर्ताओं को मंत्र दिए जाने के बाद फील्ड में सक्रिय हो गए हैं। पानीपत ग्रामीण सीट पर आठ-दस उम्मीदवार अभी से टिकट की दावेदारी जताने लगे हैं। दावेदारी करने वालों में वरिष्ठ व अनुभवी नेताओं के अतिरिक्त मेयर समेत दो पार्षद भी रेस में हैं। गुटबाजी के दौर में टिकट किसे मिलेगा.यह कांग्रेस हाइकमान तय करेगा। 2014 में कराए गए विधानसभा चुनाव में दो लाख पांच हजार मतदाताओं ने वोट डाले। पांच वर्षो में मतदाताओं की संख्या में 30 हजार का इजाफा हुआ है। ग्रामीण विधानसभा में पानीपत आउटर की 80 बाहरी कालोनियां लगती है। इन कालोनियों में 70-75 फीसद प्रवासी लोग रहते हैं। उनके वोट भी यहां बने हुए हैं। टिकट के दावेदारों की बात करें तो नए पुराने चेहरे अभी से रेस में हैं। कोई पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा गुट से टिकट लाने का दावा कर रहा है तो कोई अशोक तंवर से। एक दो भावी उम्मीदवार रणदीप ¨सह सूरजेवाला से टिकट की बात पक्की होने का दावा जता रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से संपर्क करना भी शुरू कर दिया है। टिकट की रेस में पूर्व मंत्री बिजेंद्र कादियान से लेकर एआइसीसी में दो बार ऑब्जर्वर रह चुके धर्मपाल गुप्ता भी हैं। युवा प्रदेशाध्यक्ष सचिन कुंडू, महेंद्र ¨सह कादियान व मेयर सुरेश वर्मा भी कांग्रेस की टिकट पर देहात से चुनाव लड़ने के मूड में हैं। बिजेंद्र कादियान को सोमवार को हिसार में कांग्रेस की जिला ईकाई गठित करने के लिए प्रभारी बनाया गया है। पिछली बार चुनाव लड़ चुके खुशीराम जागलान भी टिकट दावेदारों में बताए जा रहे हैं। करनाल से चुनाव लड़ चुके सुरेश गुप्ता भी राजीव गांधी से संपर्क साधने में लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो इस बार टिकट के लिए तीन पैरामीटर रहेगा। कांग्रेस हाइकमान जनता की पसंद के अनुरूप टिकट देगी। खासकर पार्टी में जिसका वजूद पहले से है उसे वरीयता देने की बात कही जा रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ग्रामीण से किसी बाहरी नेता को इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा। जातीय समीकरण भी होगा फैक्टर जातीय वोट भी टिकट निर्धारित करने में एक फैक्टर बन कर उभरेगा। टिकट चाहने वाले नेता समाज के सभी वर्गो से संपर्क साधने में लगे हैं। गांवों में दौरा करना शुरू कर दिया है।