पानी, वातावरण और सेहत की शोधकर्ताओं को ¨चता आर्य कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का हुआ समापन फ्रांस और नेपाल के शोधकर्ता रहे मौजूद जागरण संवाददाता, पानीपत : आर्य पीजी कॉलेज में रसायन विभाग की तरफ से इनोवेशन इन साइंस-इंजीनिय¨रग एंड टेक्नोलॉजी विषय पर चल रही दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस का रविवार को समापन हुआ। भारत सहित नेपाल और फ्रांस के शोधकर्ताओं ने वातावरण और पेयजल को शुद्ध बनाने और मानव स्वास्थ्य संबंधी शोध प्रस्तुत किए। ई-वाहन और फसलों के अवशेषों के निस्तारण पर बल दिया। मुख्य अतिथि जीएनए विश्वविद्यालय फगवाड़ा, पंजाब के वाइस चांसलर डॉ. वीके रत्न ने भूजल, वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ¨चता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को अभी इन विषयों पर बहुत काम करना होगा। केमिस्ट और इंजीनिय¨रग विभागों को मिलकर ड्रग सिस्टम को जनहित में बेहतर बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि फसलों के अवशेषों का जैविक खाद, गत्ता निर्माण सहित अन्य कार्यों में कैसे इस्तेमाल किया जाए, इस पर नए तरीके अपनाने की जरूरत है। सड़कों पर ई-वाहन चलाने होंगे। कॉलेज प्रबंधन समिति के वरिष्ठ सदस्य विरेंद्र ¨सगला, डॉ. संतोष टिक्कू, कान्फ्रेंस के आयोजक डॉ. अनिल कुमार ने सभी अतिथियों का आभार जताया। कॉलेज के ¨प्रसिपल डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि ऐसे आयोजन जनहित में बहुत सार्थक होते हैं। दीनबंधु छोटूराम विश्वविद्यालय ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मुरथल से प्रोफेसर अशोक कुमार शर्मा ने नैनो टेक्नोलॉजी फॉर इंवायरमेंट सेफगार्ड विषय पर शोध प्रत्र प्रस्तुत किया। इनके अलावा फ्रांस के प्रो. थैरी डरमानिन, प्रो. अमलेंदू पाल, नेपाल से विनय कुमार झा, दिल्ली विश्व विद्यालय के डॉ. पन्नूरू वेंकेटशु, डॉ. श्वेता शर्मा, प्रो. एसपी खटकर, डॉ. अनिल कुमार, प्रो. अशोक कुमार शर्मा, प्रो. दिलीप कुमार व प्रो. युसूफ ने भी शोध पत्र प्रस्तुत किए। आयोजन में इनका रहा सहयोग द इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन रोहतक, रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री (लंदन), नॉर्थ इंडिया सेक्शन, डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, डायरेक्टर जनरल हायर एजुकेशन हरियाणा। कौन सा प्रोटीन हानिकारक, पता चलेगा दिल्ली विश्वविद्यालय रसायन विभाग के डॉ. पी. वेंकेटशु ने प्रोटीन्स इन आइनिक लिक्विड पर शोध पत्र पढ़ा। उन्होंने कहा कि मानव शरीर में तमाम तरह के प्रोटीन होते हैं। किसी एक तरह के प्रोटीन की कमी या अधिकता से शरीर में बीमारी उत्पन्न हो जाती है। किस प्रोटीन की कमी और अधिकता से कौन सी बीमारी होती है। शरीर के प्रोटीन को कितने तापमान पर सुरक्षित रखा जा सकता है। इस पर उनका शोध प्रारंभिक स्थिति में है। उन्होंने ग्रीन टी और इंसुलिन के शरीर पर प्रभावों के विषय में भी बताया। ठोस प्रदूषण को द्रव्य में बदला जा सकेगा आइआइटी चेन्नई में रसायन विभाग के डॉ. रमेश गरदास ने भी वातावरण अनुकूल द्रव्य विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ठोस प्रदूषण को घुलनशील बनाने पर काम कर रहे हैं। कौन से रसायन वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, ठीक उस जैसा ही नया लवण बनाया जा सकेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इंडस्ट्रीज से निकलने वाला बेंजीन कार्सिनोजेनिक बहुत नुकसान पहुंचाता है। इसी को आयरन लिक्विड में परिवर्तित किया जाना संभव है। पोस्टर प्रतियोगिता में कृष्ण प्रथम राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी की पोस्टर प्रस्तुति में कॉलेज के कृष्ण कुमार प्रथम, प्रतीक्षा शर्मा द्वितीय, अंजू हुड्डा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रथम, डीएवी पब्लिक स्कूल सेक्टर-12 द्वितीय और राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल मॉडल टाउन ने तृतीय स्थान हासिल किया। निर्णायक मंडल में प्रो. मोहम्मद युसुफ और प्रो. रमेश शामिल रहे।

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