पानीपत/जींद, जेएनएन। बंद फैक्टरी से अचानक गैस का रिसाव होने से आसपास के क्षेत्र में लोग अलर्ट हो गए। शहर के संत नगर में 25 साल से बंद पड़ी कॉटन फैक्टरी में सिलेंडर से अचानक क्लोरीन गैस का रिसाव हो गया। इससे फैक्टरी के साथ लगते मकानों में रहने वाले लोगों की आंखों में जलन के साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत हुई। इस पर पर लोगों ने प्रशासन को सूचित किया।

पुलिस ने कई देर तक कॉलोनी के आसपास के एरिया को खंगाला। बाद में बंद फैक्टरी का ताला खुलवाया तो उसके अंदर रखे करीब डेढ़ टन के सिलेंडर से क्लोरीन का रिसाव होता मिला। इस पर हिसार से इंडस्ट्री सेफ्टी, रोहतक रोड स्थित एचपीसीएल व वीटा प्लांट की टीम को बुलाया। टीम ने निरीक्षण के बाद सिलेंडर को डिस्पोज करने में असमर्थता जताई। हालांकि गैस के रिसाव को कम करने के लिए उसे लकडिय़ों के नीचे दबा दिया। देर रात को ही प्रशासन ने  पानीपत रिफाइनरी की टीम को भी सूचित कर दिया। 

पानीपत रिफाइनरी से पहुंची टीम
अलसुबह पानीपत रिफाइनरी की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्रेन से सिलेंडर को बाहर निकलवाया और उसे नरवाना रोड स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की खाली जमीन में दबाकर डिस्पोज कर दिया शहर थाना पुलिस ने इस मामले में फैक्टरी के मालिक संत नगर निवासी ओमप्रकाश चोपड़ा के खिलाफ सिलेंडर को लावारिस छोडऩे पर केस दर्ज किया है।

वन्य प्राणी विभाग ने अपनी जमीन पर डिस्पोज करने से किया मना
बंद फैक्ट्री में पड़े सिलेंडर से क्लोरीन गैस के रिसाव से लोगों का दम घुटने लगा तो हड़कंप मच गया। पता चला लेकिन प्रशासन ने ज्यादा रुचि नहीं ली। सूचना मिलने के बाद भी पूरी रात सिलेंडर से गैस का रिसाव जारी रहा। इस कारण फैक्ट्री के साथ लगते मकान में रहने वाले लोगों को अपने बच्चों के साथ रिश्तेदारियों व जानकारों के पास जाना पड़ा।

खाली कराए गए घर 
सुबह जब पानीपत रिफाइनरी की टीम फायर सेफ्टी अधिकारी डी घोष के नेतृत्व में मौके पर पहुंची तो वहां पर क्लोरीन गैस की मात्र काफी ज्यादा थी। जब टीम ने अपने उपकरणों से हवा में क्लोरीन की मात्रा को जांचा तो वह 1.5 पीपीएम मिली, जोकि लंबे समय तक इसके प्रभाव में रहने से सेहत के लिए खतरनाक बताई और आठ घंटे तक ऐसे वातावरण रहना जानलेवा हो सकता है। सिलेंडर को उठाते समय गैस का ज्यादा रिसाव न हो जाए इसलिए पास के मकानों में मौजूद लोगों को वहां से निकाल दिया और सामान्य स्थिति होने तक बाहर रहने का आह्वान किया। जबकि कालोनी के लोगों का कहना था कि शनिवार दोपहर बाद ही गैस रिसाव का पता चल गया था, लेकिन प्रशासन ने इसके लिए गंभीरता नहीं दिखाई। इसके कारण मजबूर होकर अपने जानकारों व रिश्तेदारियों में जाना पड़ा।

639 किलो गैस की थी क्षमता
रिफाइनरी के सीनियर इंजीनियर अनिल कुमार चौहान ने बताया कि सिलेंडर का वजन 900 किलोग्राम है और इसमें 639 किलोग्राम गैस भरने की क्षमता है। जब उनकी टीम मौके पर पहुंची तो उस समय 40 से 50 किलोग्राम क्लोरीन होने का अनुमान है। सबसे पहले जहां से गैस का रिसाव हो रहा था वहां पर कैप लगाकर उसे बंद किया। क्लोरीन गैस का अधिकतर पानी को साफ करने में प्रयोग किया जाता है। सिलेंडर को पानी से भरे हुए गड्ढे में सोडियम युक्त चूना डालकर किया है। क्लोरीन व सोडियम की केमिकल रिएक्शन होकर यह नमक बन जाएगा।

अनुमति लेने में उलझी रही टीम की कार्रवाई
तहसीलदार के नेतृत्व में रिफाइनरी की टीम सुबह 6 बजे ही फैक्ट्री में पहुंच गई। जहां पर टीम ने सिलेंडर को बाहर निकालने चाहा तो बिजली के खंभे व तार अड़ गए। इसके बाद बिजली निगम के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर खंभों को काटने व तारों को हटाने की परमिशन ली। इसके बाद टीम सिलेंडर को ट्रैक्टर ट्राली में लोड करके डिस्पोज करने के लिए हांसी रोड स्थित बड़ा बीड़ वन में ले गई। जहां पर प्रशासनिक अधिकारियों के कहने पर टीम ने जेसीबी से सिलेंडर को डिस्पोज करने के लिए गड्ढा भी खोद दिया, लेकिन इसी दौरान वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए और गैस को वहां पर मौजूद पशु पक्षियों के लिए खतरनाक बताकर डिस्पोज करने से मना कर दिया। इसके बाद प्रशासन के सामने डिस्पोज के लिए जगह की समस्या बन गई। इसके बाद प्रशासनिक कर्मचारियों ने इसके लिए डीसी डॉ. आदित्य दहिया को अवगत करवाया। बाद में प्रशासन ने काफी देर तक सलाह मशवरा करके नरवाना रोड पर स्थित जनस्वास्थ्य विभाग के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में डिस्पोज करने की अनुमति दी। इसके बाद टीम उस सिलेंडर को वापस से भीड़ भाड़ वाले एरिया से पटियाला चौक होते हुए नरवाना रोड पर लेकर गए। करीब पांच घंटे सिलेंडर को इधर से उधर सड़कों पर घुमाने के बाद डिस्पोज हो सका।

दमकल, एंबुलेंस रही मौके पर तैनात
सिलेंडर के डिस्पोज करने के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो जाए इसके लिए प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया हुआ था। डिस्पोज होने तक स्वास्थ्य विभाग की दो एंबुलेंस व उनका स्टाफ मौजूद रहा। इसके साथ पानीपत रिफाइनरी सहित तीन दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर मौजूद रही। टीम के सदस्यों ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिलेंडर को कम से कम 24 घंटे पानी में रहने दे, लेकिन बेहतर यह होगा कि सिलेंडर को दो से तीन दिन इसी तरह से पानी में रहने दे।

 

Posted By: Anurag Shukla

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