पानीपत, जेएनएन। छोटी सी लापरवाही बच्‍चों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। टीकाकरण नहीं होने से वर्ष 2018 के अंत तक पानीपत में 500 बच्चे विभिन्न बीमारियों के कारण काल का ग्रास बन चुके हैं। पानीपत में टीकाकरण 78-80 फीसद तक सिमट कर रह गया है। 16-26 माह और 5-6 वर्ष की आयु में लगने वाला डीपीटी (डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस) का बूस्टर टीका तो करीब 40 फीसद बच्चों को नहीं लग पाता।

गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ टीकाकरण अभियान की प्‍लानिंग करता है। यूनिसेफ फंड मुहैया कराता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में करीब 78 फीसद बच्चों का ही टीकाकरण हो पाता है। हालांकि, हेल्थ मैनेजमेंट इंफोर्मेशन सिस्टम (एचआइएमएस), पानीपत की रिपोर्ट 90 फीसद अचीवमेंट की है। टीकाकरण में पिछडऩे का कारण अभिभावकों की लापरपाही, स्वास्थ्य विभाग की टीकाकरण टीमों का बाहरी कालोनियों तक नहीं पहुंचना और अन्य संबंधित विभागों की सुस्ती माना जा रहा है। एचआइएमएस की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में जिले में करीब 25 हजार 780 बच्चों ने जन्म लिया। 0-5 साल की जीवित जन्म मृत्यु दर 19 प्रति हजार है। इसका सबसे बड़ा कारण टीकाकरण चक्र पूरा नहीं होना और कुपोषण-संक्रमण को बताया गया है।

निजी स्‍कूलों में नहीं चलता टीकाकरण अभियान
डिस्ट्रिक्ट अर्बन नोडल अधिकारी डॉ. मनीष पासी ने बताया कि बूस्टर टीका से वंचित बच्चों में अधिकांश प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थी हैं। इसका कारण है कि इन स्कूलों में टीकाकरण अभियान नहीं चलाया जाता। सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम टीका लगाने पहुंचती है।

कौन सा टीका कब और किस बीमारी से बचाव

  • जन्म के बाद 24 घंटे के अंतराल में बच्चे को बीसीजी और हेपेटाइटिस बी का टीका तथा ओपीवी वैक्सीन मिल जानी चाहिए। ये डोज बच्चे को टीबी रोग, पीलिया और पोलियो से बचाव करती है।
  • पैंटावैलेंट वैक्सीन बच्चों को डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, हेपेटाइटिस बी यानि पीलिया से बचाव करता है। यह टीका डेढ़ से ढ़ाई माह के अंतराल में लग जाना चाहिए।
  • एमआर का टीका मीजल्स (खसरा) और रूबेला (जर्मन खसरा) से बचाता है। 9-12 माह की आयु में यह टीका लगना चाहिए। किसी कारण चूक गए हैं तो 15 वर्ष तक के बच्चों को टीका लगवा सकते हैं।
  • रोटा वायरस की खुराक बच्चों को डायरिया से बचाव करती है। यह खुराक 6वें, 10वें और 14वें सप्ताह में दी जाती है।
  • जेई का टीका बच्चों को जापानी बुखार से बचाता है। यह 9-12 माह की आयु तक लगना चाहिए।
  • पीसीवी यानि न्यूमोकोकल कॉन्जगेट वैक्सीन बच्चों को निमोनिया से बचाती है। यह बच्चे को जन्म के 6वें, 14वें और तीसरी डोज नौ माह की आयु में मिल जानी चाहिए।

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ई रिक्‍शा से जाती एनएनम।

आउट रिच क्षेत्रों में जाएगी ई-रिक्शा
स्वास्थ्य विभाग ने आउट रिच क्षेत्रों में टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब एएनएम ई-रिक्शा में सवार होकर पहुंचेंगी।  छह ई-रिक्शा अलग-अलग क्षेत्रों में भेजी गई हैं। डॉ. पासी ने बताया कि उद्देश्य टीकाकरण लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा करना है। कुछ क्षेत्रों में विभाग के गाडिय़ां नहीं पहुंच पाती थी। कई बार वाहनों का भी अभाव रहता था। 

Posted By: Ravi Dhawan