पानीपत, जेएनएन। ये आपदा में अवसर बनाने वाले नहीं, आपदा के असुर हैं। हैदराबादी अस्पताल स्थित एपी मेडिकल स्टोर के संचालक सेक्टर 13-17 के प्रदीप ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने शुरू कर दिए। उत्तराखंड के एक व्यक्ति से 750 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदे। इनमें से 650 इंजेक्शन भांजे-दोस्तों व मेडिकल स्टोर संचालकों व लैब मैनेजर को 15 से 30 हजार रुपये प्रति इंजेक्शन बेच दिए। उसने प्रति इंजेक्शन 12000 रुपये से खरीदा। एक सप्ताह में यानि 90 लाख रुपये के नकली इंजेक्शन खरीदे। करीब एक करोड़ 95 लाख में इन्हें बेचा। यानी एक करोड़ से ज्यादा की कमाई की। बचे हुए सौ इंजेक्शन के बारे में पुलिस पता लगा रही है। भानजे ने ही पोल खोल दी। 

अगर पुलिस के हत्थे इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाले तीन गिरोह के सात बदमाश नहीं पकड़े जाते तो न जाने ये प्रदीप कितने और करोड़ रुपये कमा लेता। वह नकली इंजेक्शन से कोरोना रोगियों की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहा था। क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (सीआइए-वन) ने आरोपित प्रदीप को अदालत में पेश कर चार दिन की रिमांड पर लिया है।

अब पूछेंगे कि कहां से लाया था

रिमांड के दौरान आरोपित प्रदीप से पूछताछ की जाएगी कि इंजेक्शन बेचने वाले उत्तराखंड के व्यक्ति और अन्य इंजेक्शन खरीदने वाले गिरोह के सदस्यों के ठिकानों का पता लगाया जाएगा। यह भी पता लगाया जा रहा है कि प्रदीप ने और कितने जिलों में नकली इंजेक्शन की सप्लाई करवाई है। इस मामले में करीब 10 और आरोपित पुलिस के शिकंजे में फंसेंगे।

भांजे को बेचे थे 100 इंजेक्शन, उसी ने खोल दी मामा की पोल

प्रारंभिक पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि उसने भांजे कच्चा कैंप गुरुनानकपुरा के सुमित को 100, कलंदर चौक के केशव उर्फ कन्नू को 40 और सक्षम को 150 इंजेक्शन बेचे थे। इसी तरह से रविंद्रा अस्पताल स्थित सैनी मेडिकल स्टोर के मालिक मनोज को भी इंजेक्शन दिए थे। पुलिस को समक्ष की तलाश है। पुलिस की गिरफ्त में फंसे भांजे सुमित ने ही मामा के गोरखधंधे की पोल खोल दी। पुलिस ने आरोपित सुमित, केशव और जलालपुर गांव के सुनील को चार दिन की रिमांड के बाद अदालत में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया।

सरगना सहित आठ आरोपितों की हो चुकी है गिरफ्तारी

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के मामले में सरगना प्रदीप और अन्य तीन गिरोह के सात सदस्य पुलिस गिरफ्त में आ चुके है। आरोपितों में प्रदीप का भानजा सुमित, केशव, सुनील, मेडिकल स्टोर संचालक मनोज, लाल पैथ लैब का एरिया मैनेजर इमरान, शिवनगर का हिमांशु उर्फ गोलू और उसका जीजा सेक्टर 13-17 के आशीष उर्फ आशु शामिल हैं।

धंधेबाज अस्पतालों के बाहर घूमते थे, वहीं पर बेचते थे इंजेक्शन

पुलिस पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे निजी अस्पतालों के बाहर घूमते रहते थे। जैसे ही किसी व्यक्ति को रेमडेसिविर की जरूरत होती थी तो वे मेडिकल स्टोर से सस्ता इंजेक्शन देने का झांसा देते और नकली इंजेक्शन बेच देते थे। लोगों को उन पर शक भी नहीं होता था।

गिरोह के बारे में सूचना दें

सीआइए-वन प्रभारी इंस्पेक्टर राजपाल सिंह ने बताया कि असली रेमडेसिविर इंजेक्शन और नकली के रैपर में अंतर हैं। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि नकली इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह के बारे में पुलिस को सूचना दें। ताकि गिरोह के सदस्यों को पकड़ा जा सके।

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