पानीपत, [विजय गाहल्याण]। समालखा और इसराना (पहले नौल्था) विधानसभा क्षेत्र में वकीलों की चौधर रही है। 1977 में नौल्था से सींक गांव के एडवोकेट सतबीर सिंह मलिक कांग्रेस के मंसाराम को हराकर विधानसभा पहुंचे। वे वित्त मंत्रालय सहित 14 महकमों के साथ प्रदेश के सबसे पावरफुल मंत्री भी रहे। सबसे ज्यादा मंत्रालय का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है।

इसी क्षेत्र से 1987 और 2000 में लोकदल के सिवाह गांव के एडवोकेट सतबीर सिंह कादियान और 1996 में हविपा के सिवाह गांव के बिजेंद्र सिंह उर्फ बिल्लू विधायक चुने गए। सबसे कम मतों से जीतने का रिकॉर्ड समालखा क्षेत्र का है। यहां 1976 में बीजेएस एडवोकेट रणधीर सिंह ने कांग्रेस के एडवोकेट कटार सिंह को 114 मतों से हरा दिया था। 

समालखा से 1968 में कांग्रेस के एडवोकेट कटार सिंह व 1977 में जेएनपी के एडवोकेट मूलचंद और 1987 में लोकदल के एडवोकेट सचदेव त्यागी विजेता रहे। फरीदाबाद के व्यवसायी करतार सिंह भड़ाना पहले ऐसे नेता थे जो बाहरी होते हुए भी लगातार दो बार समालखा से चुनाव जीते। वे भी अलग-अलग पार्टियों से। वे 1996 में हरियाणा विकास पार्टी और 2000 में इनेलो के टिकट से विजयी रहे। ये रिकॉर्ड अभी तक नहीं टूटा है। 

फौजी सबसे ज्यादा मतों से जीते, पुलिसकर्मी ने पुलिसकर्मी को हराया

वर्ष 2005 में कांग्रेस के प्रत्याशी सेवानिवृत्त फौजी भरत सिंह छौक्कर ने कांग्रेस के कटार सिंह को 23765 मतों से हराया। यह यहां की सबसे बड़ी जीत रही। 2014 में पुलिसकर्मी रहे रविंद्र मच्छरौली ने निर्दलीय से पुलिस से सेवानिवृत्त कांग्रेस के धर्म सिंह छौक्कर को 20363 मतों से शिकस्त दी। जीत हासिल करने वाले रविंद्र पहले निर्दलीय विधायक रहे।   

शहर में उद्यमी और ग्रामीण में जमींदार विजयी रहे 

पानीपत शहर विधनसभा क्षेत्र में जनसंघ के उद्यमी फतेहचंद विज के 1962, 1967 और 1968 में चुनाव जीते थे। उद्यमी बलबीर पाल शाह 2000, 2005 और 2009 में विधायक बने। दोनों के नाम लगातार तीन बार विधायक बनने का रिकॉर्ड है। पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र 2009 में बना और यहां से जमींदार निर्दलीय ओमप्रकाश जैन चुने गए। 2014 में भाजपा के टिकट पर जमींदार महीपाल ढांडा चुनाव जीते।

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