पानीपत, [रवि धवन]। कंटेनर का किराया छह गुना तक बढऩे के कारण टेक्सटाइल निर्यातकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। न्यूयार्क तक पीक सीजन में पहले दो हजार डालर (1,48,000 रुपये) में चालीस फीट का कंटेनर भेजा जाता था। शिपिंग कंपनियों ने उसी कंटेनर का किराया 12 हजार डालर (8,88,000) कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर सस्ते आइटम पर पड़ा है। पुफ (सोफा-कुर्सी आइटम, आम भाषा में मुढ़ा) निर्यात का भारत बड़ा बाजार बन चुका है। एक कंटेनर में 800 पीस आते हैं। औसत कीमत होती है 12 हजार डालर, खरीदार को अब इतना ही किराया देना पड़ रहा है। न्यूयार्क से आर्डर तो मिल रहे हैं लेकिन खरीदारी डिलीवरी नहीं करा रहे। पुफ जगह ज्यादा घेरता है। निर्यातक स्टाक बनाकर रख रहे हैं। लेकिन ज्यादा दिनों तक स्टाक नहीं रख सकेंगे। महीने तक हालात नहीं सुधरे तो आर्डर लेने ही बंद करने होंगे।

पानीपत से हर महीने करीब पांच सौ कंटेनर पुफ के जाते हैं। लगभग 50 करोड़ का कारोबार होता है। इस समय कंटेनर भी नहीं मिल रहे, किराया भी छह गुना है, इस वजह से डिलीवरी बीस फीसद भी नहीं कर रहे। स्टाक बढ़ता जा रहा है।

सितंबर महीने में क्रिसमस के आर्डर आने शुरू हो जाते हैं। अक्टूबर से ही डिलीवरी शुरू होती है तो जाकर यूरोप और यूएसए के सभी स्टोर तक माल पहुंच पाता है। कोरोना की वजह से दुनियाभर में लाकडाउन लगा। हालात सुधरे तो विदेश में लोगों ने सभी पुराने होम फॢनशिंग स्टाक को बदलकर नया सामान लेना शुरू किया। दरी, कुशन कवर, बेडकवर से लेकर पुफ तक नए मंगाए गए। कोरोना फैलने का कारण चीन को बताया गया, इसलिए दुनिया के देशों ने चीन से टेक्सटाइल उत्पाद मंगाने कम कर दिए। आर्डर भारत आने लगे। एकाएक मांग ज्यादा निकली तो कंटेनरों की मांग बढ़ गई। शिपिंग कंपनियों ने इसका फायदा उठाते हुए किराया ही छह गुना तक बढ़ा दिया।

पानीपत में पुफ उत्पादन में सबसे आगे है श्याम एक्सपोर्ट। आशीष गर्ग और विवेक शर्मा इतने प्रयोगवादी हैं कि हर रोज नया डिजाइन निकालने का प्रयास करते हैं। विवेक शर्मा कहते हैं कि इस समय पुफ इंडस्ट्री बहुत बड़े संकट में हैं। खरीदार पुफ बनवाते जा रहे हैं लेकिन डिलीवरी नहीं करा रहे। ज्यादा दिनों तक वे भी उत्पादन नहीं कर सकेंगे।

ये एकाधिकार का मामला है

निर्यातक रमन छाबड़ा का कहना है कि ये एकाधिकार का मामला है। शिपिंग कंपनियों ने मिलकर दाम बढ़ाए हैं। खरीदारों को उम्मीद है कि किराया कम होगा, इसी वजह से आर्डर देकर डिलीवरी नहीं करा रहे। पूरे पानीपत में निर्यातकों के पास माल अटका पड़ा है। सबसे ज्यादा नुकसान पुफ इंडस्ट्री को पड़ रहा है। रिलायंस और टाटा जैसी कंपनियों को शिपिंग लाइन में आना चाहिए, ताकि भारत इस इंडस्ट्री में मजबूत हो। अगर भारत की बड़ी कंपनियां महज घोषणा ही कर देंगी तो भी शिपिंग कंपनियां किराया कम कर देंगी। अभी हालात ये हैं कि खरीदारी पहले आठ से दस कंटेनर मंगाते थे, अब एक या दो ही मंगा रहे हैं।

 

पुफ की इंडस्ट्री ठप हो जाएगी

निर्यातक विनीत शर्मा ने जागरण से बातचीत में कहा कि जो उत्पाद जितना ज्यादा सस्ता है, उसी पर मार पड़ रही है। इसमें सबसे आगे है पुफ। दस से बीस डालर का पुफ जगह घेरता है। एक कंटेनर में 12 से 15 हजार डालर तक माल आता है। इतना ही अगर किराया हो जाएगा तो स्वाभाविक है कि खरीदार डिलीवरी नहीं करेगा। इंतजार करेगा। निर्यातकों के पास इतनी जगह नहीं है कि माल बनाकर स्टाक रखते जाएं। एक उभरती हुई इंडस्ट्री को झटका लगा है। केंद्र सरकार इसमें सहयोग करे। कंपनियों से बात करे या सब्सिडी जैसे विकल्प निकाले। इसी तरह टेक्सटाइल के दूसरे उत्पादों पर असर पड़ रहा है।

Edited By: Anurag Shukla