पानीपत, जागरण संवाददाता। पानीपत के बाबरपुर का नाम बदलकर नानकपुर हो गया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भले ही योगी की तरह नगरों-उपनगरों के नाम परिवर्तन करने में रुचि न दिखाई हो, लेकिन प्रमोद विज ने ऐसा कर दिखाया है। पानीपत शहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रमोद विज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर नगर निगम की बैठक में नाम बदला।

ये है बड़ी वजह

नगर निगम सदन में शहर क्षेत्र के विधायक विज ने कहा कि गुरु नानक देव जी पानीपत आए थे, इसलिए बाबरपुर का नाम नानकपुर रखा जाना चाहिए। सदन ने इसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। अब नगर निगम अपने अभिलेखों में बाबरपुर को नानकपुर अंकित करेगा। संभव है कि यह प्रस्ताव निगम प्रदेश सरकार को प्रेषित करे और वहां से इसकी स्वीकृति मिल जाए।

शहर विधानसभा क्षेत्र के विकास का ध्‍यान देना चाहिए

विज ने जब कहा कि विकास कार्यों में शहर विधानसभा क्षेत्र पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त कार्य हो चुके हैं तो वार्ड 13 के पार्षद शिवकुमार शर्मा भड़क गए। उन्होंने कहा कि शहर को दो हिस्सों में बांटने का काम किया जा रहा है। दोनों क्षेत्रों में एक समान राशि खर्च होनी चाहिए। जितने काम की आवश्यकता शहरी विधानसभा क्षेत्र को है, उतनी ही ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को है। दोनों को अलग-अलग नजरिए से देखना गलत है।

हंगामा भी हुआ

वास्तव में हुआ यह कि मनोनीत पार्षद सुनील सोनी ने आरोप लगाया कि शहरी विस क्षेत्र में कोई काम नहीं रहा, ग्रामीण क्षेत्र में अधिक काम किए जा रहे हैं। इस पर हंगामा होने लगा तो विधायक ने सोनी के बचाव में कहा कि शहर विस क्षेत्र ग्रामीण विस क्षेत्र से बड़ा है। यहां शहर विस क्षेत्र में 14 माह से विकास कार्य नहीं हुए। ग्रामीण विस क्षेत्र में सभी विकास कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। उनके इस कथन का शिवकुमार शर्मा तीखा विरोध किया।

बैठक में नहीं पहुंचे ये पार्षद

बैठक में 19 पार्षदों ने भाग लिया, सात नहीं पहुंचे। वार्ड एक से अनिता परूथी, दो के पार्षद पवन गोगलिया, छह से रविंद्र फुले, आठ से चंचल सहगल, 12 से सतीश सैनी, 19 से निशा और 20 से लोकेश नांगरू बैठक में नहीं पहुंचे।

समय पर काम न हुआ तो एफआइआर

बैठक में खराब पड़ी लाइटों की मरम्मत, पेयजल के लिए ट्यूबवेल लगाने व सफाई व्यवस्था के मुद्दे पर पार्षदों ने अधिकारियों घेरा तो निगम आयुक्त श्यामलाल पूनिया ने निर्देश दिए कि 15 दिन के अंदर-अंदर सभी कार्य निपटाए जाएं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।

Edited By: Anurag Shukla